यूनेस्को का नया ऐलान और नासा की आंखें: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की ‘परम सत्य’ खबरें

स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में। यहाँ ज्ञान की नदियाँ नहीं, बल्कि फॉरवर्डेड संदेशों की ऐसी सुनामी बहती है जिसमें तर्क और विज्ञान तिनके की तरह बह जाते हैं। सुबह की ‘पिंक रोज’ वाली गुड मॉर्निंग से शुरू होकर रात के ‘कैंसर के अचूक घरेलू नुस्खों’ तक, हमारी इस यूनिवर्सिटी में हर उस बीमारी और समस्या का इलाज उपलब्ध है जो अभी तक आधुनिक विज्ञान ने खोजी भी नहीं है। आइए, आज कुछ ऐसे ही महान वायरल दावों की कड़वी सच्चाई का पोस्टमार्टम करते हैं।

यूनेस्को का एकमात्र काम: भारत को सर्टिफिकेट बांटना

क्या आपको पता है कि यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया भर की ऐतिहासिक धरोहरों को संभालने के अलावा कोई और काम नहीं बचा है? जी नहीं, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञानियों के अनुसार, यूनेस्को के अधिकारी दिन-रात बस इसी ताक में रहते हैं कि कब भारत से कोई संदेश आए और वे उसे “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ” घोषित कर दें। कभी हमारा राष्ट्रगान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बन जाता है, तो कभी दिवाली की रात स्पेस से ली गई भारत की चमचमाती तस्वीर (जो वास्तव में किसी बच्चे के पेंट ब्रश का कमाल होती है)। यूनेस्को के मुख्यालय को खुद नहीं पता कि उन्होंने कब यह घोषणा की, लेकिन आपके परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप में बैठे ‘परम पूज्य ताऊजी’ ने इसे फॉरवर्ड किया है, तो यह ब्रह्मांड का अंतिम सत्य ही होगा!

नासा के वैज्ञानिकों का ‘देसी नुस्खा’ कनेक्शन

हमारी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दूसरा सबसे बड़ा मददगार संस्थान है नासा (NASA)। बेचारे अमेरिकी वैज्ञानिक अपनी लैब बंद करके हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स पर नजर रखते हैं। वायरल दावों के अनुसार, नासा ने स्वीकार किया है कि शंख बजाने से कोरोना भाग जाता है और तांबे के बर्तन में पानी पीने से इंसान सीधे अमरता को प्राप्त कर सकता है। गनीमत है कि नासा वालों ने अभी तक अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस सूट की जगह खादी का कुर्ता पहनने की सलाह नहीं दी है। इस अद्भुत शोध के लिए नासा के वैज्ञानिकों को व्हाट्सएप की तरफ से ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ का नोबेल पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

11 लोगों को भेजें और चमत्कार देखें!

इस यूनिवर्सिटी का सबसे डरावना और चमत्कारी नियम है – “इस संदेश को तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक कोई बहुत बड़ी खुशखबरी मिलेगी।” विज्ञान आज तक इस बात का पता नहीं लगा पाया कि आपके संदेश भेजने से लॉटरी के नंबर का क्या संबंध है, लेकिन हमारे ग्रुप के एडमिन इस थ्योरी को आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत से भी ऊपर मानते हैं। यदि आपने इसे फॉरवर्ड नहीं किया, तो आपके फोन की स्क्रीन चटक सकती है या आपकी चाय ठंडी हो सकती है!

संक्षेप में कहें तो, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान वह कड़वा सच है जिसे निगलना नामुमकिन है और उगलना ‘ग्रुप से बाहर’ होने का रास्ता है। इसलिए अगली बार जब आपके फोन की घंटी बजे और कोई “नासा प्रमाणित” दावा आपकी स्क्रीन पर आए, तो अपने दिमाग का ‘फैक्ट-चेकर’ जरूर ऑन कर लें। वरना काक-वाणी तो आपको कड़वा सच सुनाने के लिए हमेशा तैयार खड़ी है!

कागा जी