हमारे देश में ज्ञान के दो ही स्रोत बचे हैं—एक तो वह जो सदियों से ग्रंथों में दर्ज है, और दूसरा वह जो सुबह-सुबह आपके “फैमिली ग्रुप” में चाय की प्याली के साथ टपकता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ की, जिसके कुलपति, विभागाध्यक्ष और रिसर्चर हमारे-आपके प्यारे फूफाजी, मौसाजी और मोहल्ले के वेले शर्मा जी हैं। इन दिनों इस महान विश्वविद्यालय से ऐसे-ऐसे दावे वायरल हो रहे हैं, जिन्हें सुनकर न्यूटन और आइंस्टीन भी स्वर्ग में अपनी खोपड़ी खुजला रहे होंगे।
नासा का हैरान करने वाला ‘सत्य’ और यूनेस्को का नया अवॉर्ड
हालिया वायरल मैसेज का दावा है कि नासा के वैज्ञानिकों ने जब अपने सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप को भारत की तरफ घुमाया, तो उन्हें हर घर की रसोई से नीली रंग की ‘कॉस्मिक तरंगें’ निकलती दिखीं। दावा किया जा रहा है कि यदि आप सुबह उठकर तांबे के लोटे में पानी पीते हुए सीधे पैर से पांच कदम पीछे चलेंगे, तो आपके शरीर के सारे टॉक्सिन्स सीधे नासा के सर्वर पर अपलोड हो जाएंगे।
इसी कड़ी में यूनेस्को ने भी फुर्ती दिखाते हुए भारत के हर दूसरे वॉट्सऐप मैसेज को “विश्व का सर्वश्रेष्ठ मैसेज” घोषित कर दिया है। बेचारे यूनेस्को के अधिकारियों को खुद नहीं पता कि उन्होंने कब और किस मीटिंग में यह सम्मान बांट दिया, लेकिन हमारे ग्रुप के एडमिन साहब पूरे भरोसे के साथ इस ज्ञान को देशहित में प्रसारित कर रहे हैं।
नींबू-मिर्च का परमाणु विज्ञान और ’10 लोगों’ को भेजने का महा-चमत्कार
वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के ‘डिपार्टमेंट ऑफ डोमेस्टिक साइंस’ ने तो कमाल ही कर दिया है। एक वायरल पोस्ट के मुताबिक, यदि आपका मोबाइल हैंग हो रहा है, तो उस पर दो बूंद नींबू का रस निचोड़कर धूप में रख दें। दावा है कि नींबू के सिट्रिक एसिड से मोबाइल के वायरस ‘आत्महत्या’ कर लेते हैं। अब इस वैज्ञानिक प्रयोग के बाद अगर आपका फोन हमेशा के लिए कोमा में चला जाए, तो दोष आपकी श्रद्धा पर मढ़ा जाएगा, विज्ञान पर नहीं।
इस पूरे खेल का सबसे डरावना हिस्सा है—”इसे तुरंत 10 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी।” लोग इस खौफ में जी रहे हैं कि अगर फॉरवर्ड नहीं किया, तो शायद कल सुबह उनकी चाय में चीनी की जगह नमक न मिल जाए!
‘काक-वाणी’ का अंतिम फैक्ट-चेक
फैक्ट-चेक का निष्कर्ष: ‘काक-वाणी’ की खोजी टीम ने गहन रिसर्च के बाद पाया है कि इन वायरल दावों में उतनी ही सच्चाई है, जितनी कि आपके ‘सिंगल’ दोस्त के मिंगल होने के चांस में। नासा अभी भी अंतरिक्ष के चक्कर काट रहा है और यूनेस्को के पास आपके पारिवारिक ग्रुप्स को मॉनिटर करने का फालतू समय नहीं है। इसलिए अगली बार जब कोई चमत्कारी मैसेज आपके इनबॉक्स में आए, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें, फॉरवर्ड की जगह डिलीट बटन दबाएं और देश के इंटरनेट डेटा को मोक्ष की प्राप्ति कराएं।