भूत की परी
दीपावली लगभग आ रही थी और सभी लोग अपने-अपने घरों का साज-सज्जा कर रहे थे। एक बच्चे की नयी नयी शादी थी जिसकी तैयारियां चल रही थीं। उसी दिन बच्चे की पटकथा की मंजूरी मिल गयी और दोनों परिवारों ने तैयारी शुरू कर दी।
बच्चे का घर अगले महीने में अन्य परिवार से शादी के लिए नवाबगंज में जाना था, तो तैयारियों में जल्दी की एहमियत थी। दोनों परिवारों के लोग बोहोत मेहनत कर रहे थे और शादी के लिए तैयार हो रहे थे।
उस रात को बहुत सारे इंसानों ने थकान और मेहनत के बाद सोने की तैयारी की। इसी दौरान, बच्चे की मां के साथ उसके कामरे में कोई आई। वो एक लड़की थी जिसके साथ कुछ अजीब कुछ नः पता क्या था। उसने छोटे बच्चे को चाट कर बोला, “शुभकामनाएं, जल्दी-जल्दी सो जाओ, मैं पैरी हूँ।”
लड़की ने मुस्कुराया और चली गयी। पर बच्चे की मां ने देखा नहीं की किसी के जाने के बाद एक साये जैसी चीज उसके बच्चे के पास आकर रुक जाती है फिर वो चली जाती है।
बीच-बीच में उस जगह पर जैसे बहुत सारे साये आते जाते थे। इन चीजों का कोई नाम नहीं था लेकिन सब लोग उन्हें ‘भूत’ कहते थे। लेकिन इस घटना को कोई व्यक्ति नहीं जानता था कि बच्चे की मां को उस वक्त तरह-तरह से बीमारियों से जूझना पड़ता था और वो रात के साथ कब्जे में नहीं रह पाती थीं।
शुभ होली वाले दिन, बच्चे की कुछ मांगें बाकी रह गयी थीं। इसी दौरान, एक शक्ति ने महसूस किया कि उसे बच्चे की मां की मदद करने की जरूरत है। इस शक्ति ने एक परी बनी और उस जगह पर पहुँची। वह परी बच्चे के कमरे में चली गयी और बच्चे की मां को देखा। उसने देखा कि मां एक अद्भुत सोंग का अनुभव कर रही थीं जो उसे बहुत अच्छा लग रहा था।
परी ने सोचा कि उसे बच्चे के गम के बारे में जानना होगा। इसीलिए उसने बच्चे को चाट कर बोला, “अगली बार मैं तुम्हें इस तकलीफ से कैसे छुटकारा पाना है बताऊंगी।”
बच्चे ने सीधा पूछा, “तुम कौन हो?”
परी ने उसे बताया कि वो एक परी हैं जो सामने आयी है ताकि उसे मां की मदद कर सके। बच्चे ने इसे स्वीकार कर लिया।
परी ने कुछ कहानियों से बच्चे को प्रभावित करने के लिए कहा जो उसे पता नहीं थी। उसे बिना घबराये उसे सभी कहानियों में रूचि आयी थीं।
कुछ दिनों बाद, शादी के दिन, बच्चे की मां को ठीक लगता हुआ सभी विवरणों के साथ पीटरसबर्ग जाना पड़ता हैं। बच्चे के परिवार अपने स्थान पर जाते हुए वह महसूस करता है कि एक ताकत उसे पीटरसबर्ग जाने से रोकने जा रही हैं।
वह गंभीर होता हुआ परी की कम्यांड पर उस ताकत का सामना करता हैं। यदि उसे विजयी होना होता हैं, तो उसे परी भी मदद करती हैं।
बच्चे की मां और परिवार ने चलते समय परी को बोहोत दुआएं दीं। बच्चे और उसकी महिला हमसफर को अब एक सकारात्मक अनुभव हैं और वह एक नये अध्याय के लिए तत्पर हैं। उसने कभी नहीं सोचा था कि एक परी उसे अपनी तकलीफ से छुटकारा दिलाने में इतना मददगार हो सकती हैं।
बच्चे की मां बोलती हैं, “अगली बार जब भी तुम्हें कोई समस्या हो, तुम मुझे बताना और एक बार फिर मैं उस परी को बुलाऊंगी।”
किसी भी प्रकार की समस्या से निपटने के लिए एक संसाधन होना बहुत महत्वपूर्ण होता हैं। महत्वपूर्ण होता हैं कि एक दूसरे की मदद करना और साथ निभाना।