क्या आपको वो दौर याद है जब फिल्मों की कहानी डायरेक्टर के दिल से निकलकर सीधे दर्शकों के दिलों में उतर जाती थी? जब राज कपूर, गुरु दत्त या यश चोपड़ा की फिल्मों को देखकर लगता था कि भाई, किसी ने अपनी आत्मा को पर्दे पर उतार दिया है। लेकिन आज? आज जब आप थिएटर से बाहर निकलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे किसी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के सालाना ऑडिट की रिपोर्ट देखकर आ रहे हों। हाल ही में मेन्सएक्सपी (MensXP) की एक रिपोर्ट ने इसी कड़वे सच पर उंगली उठाई है, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है: “आई मिस व्हेन इंडियन फिल्ममेकर्स मेड फिल्म्स आउट ऑफ पैशन, नॉट स्प्रेडशीट्स।”
जब ‘क्रिएटिविटी’ पर भारी पड़ी ‘कैलकुलेटर’
काक-वाणी के गलियारों में आजकल इसी बात की चर्चा है कि हमारे प्यारे Bollywood Filmmakers को आखिर हो क्या गया है? पहले लेखक अपनी डायरी में जज्बात लिखते थे, आज के दौर में प्रोड्यूसर्स एक्सेल शीट (Excel Sheets) पर मुनाफे का गणित लगाते हैं। किस एक्टर की सोशल मीडिया फॉलोइंग ज्यादा है? किस गाने पर इंस्टाग्राम रील्स ज्यादा बनेंगी? कौन सा रीमेक सबसे सेफ रहेगा? इन सारे सवालों के जवाब जब स्प्रेडशीट के डेटा में फिट बैठते हैं, तब जाकर फिल्म को हरी झंडी दिखाई जाती है। नतीजा? स्क्रीन पर बिना आत्मा की, प्लास्टिक जैसी चमकने वाली बोरिंग फिल्में दिखाई देती हैं!
क्या सच में ‘स्प्रेडशीट’ ने मार दिया सिनेमा का जादू?
आजकल बॉलीवुड में फिल्में ‘बनाई’ नहीं जातीं, बल्कि फैक्ट्री के प्रोडक्ट की तरह ‘मैन्युफैक्चर’ की जाती हैं। कॉर्पोरेट स्टूडियोज के आने से बजट तो सैकड़ों करोड़ का हो गया है, लेकिन कहानियों का बजट कंगाली की कगार पर है। जब फिल्ममेकिंग का फैसला कोई विजनरी डायरेक्टर नहीं, बल्कि सूट-बूट पहने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में ‘रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट’ (ROI) देखकर लिया जाता है, तो सिनेमा का दम घुटने लगता है। दर्शक अब इस कॉर्पोरेट चालाकी को अच्छे से समझने लगे हैं।
यही वजह है कि आज बिना किसी बड़े स्टार या भारी-भरकम ‘फॉर्मूले’ के बनी छोटी फिल्में भी अपनी सादगी और पैशन की वजह से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं, जबकि 300 करोड़ के बजट वाले कबाड़ बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिर जाते हैं। काक-वाणी का तो सीधा मानना है हुजूर—जनता को थिएटर में ‘कैलकुलेशन’ नहीं, ‘इमोशन’ चाहिए। बॉलीवुड के मेकर्स, अब तो लैपटॉप बंद करो, एक्सेल शीट को डिलीट मारो और जरा अपने दिल के पन्नों को टटोलना शुरू करो!
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