लोकतंत्र के दो रखवाले: ‘तारीख’ वाले मायलॉर्ड और ‘रील्स’ वाले क्रांतिकारी!

वाह! क्या गंभीर सवाल उठाया है हमारे बुद्धिजीवियों ने। ‘न्यूजलॉन्ड्री हफ्ता 609’ में चर्चा गरम है कि क्या भारतीय न्यायपालिका लोकतंत्र की नैया डुबो रही है, और क्या हमारे ‘जेन जेड’ (Gen Z) के बच्चे छात्र राजनीति में नया प्राण फूंकेंगे? ‘काक-वाणी’ के दफ्तर में बैठकर जब हमने इस पर विचार किया, तो हमारी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। वाकई, देश का भविष्य बहुत ही सुरक्षित हाथों में है!

मायलॉर्ड का ‘सीलबंद’ न्याय और हमारा लोकतंत्र

सबसे पहले बात करते हैं हमारी न्यायपालिका की। कुछ सिरफिरे लोग कह रहे हैं कि अदालतें लोकतंत्र को बचा नहीं पा रही हैं। अरे भाई, न्यायपालिका तो लोकतंत्र को इतनी शिद्दत से बचा रही है कि उसे ‘सीलबंद लिफाफे’ में सुरक्षित रख दिया है, ताकि बाहर की दूषित हवा उसे छू भी न


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कागा जी