जब भी पर्दे पर एक कड़क और बेबाक आवाज गूंजती है—”अच्छा है, बहुत अच्छा है!”—तो समझ जाइए कि सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों का तूफान आने वाला है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के सबसे अनप्रेडिक्टेबल और दमदार अभिनेता नाना पाटेकर की। हाल ही में ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ‘वाइल्ड कार्ड’ घोषित किया है। इस खास टैग ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समय बदल सकता है, लेकिन नाना का जलवा हमेशा बरकरार रहेगा।
नाना पाटेकर: एक्टिंग की दुनिया के इकलौते बागी
बॉलीवुड में जहां हमेशा से चमक-दमक और चॉकलेट हीरोज का बोलबाला रहा है, वहीं नाना पाटेकर ने हमेशा अपनी शर्तों पर काम किया है। उनका अभिनय कोई बनावटी मेलोड्रामा नहीं, बल्कि कड़क चाय की तरह है, जो सीधे दिल और दिमाग पर असर करती है। ‘परिंदा’ का खूंखार अन्ना हो, ‘क्रांतिवीर’ का बागी प्रताप, या फिर ‘वेलकम’ का उदय भाई—नाना ने हर किरदार को इस तरह जिया है कि वो अमर हो गए। ‘काक-वाणी’ के इस खास बुलेटिन में हम कह सकते हैं कि नाना जैसे अभिनेता सदियों में एक बार पैदा होते हैं।
हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया ने क्यों कहा इन्हें ‘वाइल्ड कार्ड’?
आखिर एक ‘वाइल्ड कार्ड’ कौन होता है? वो जो खेल में अचानक एंट्री लेकर सारे नियम बदल दे। नाना पाटेकर ने भी हिंदी सिनेमा के हर स्थापित नियम को तोड़ा है। उनकी डायलॉग डिलीवरी की रफ्तार और चेहरे के हाव-भाव इतने अप्रत्याशित होते हैं कि सामने खड़ा सह-कलाकार भी हैरान रह जाता है। ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ ने उनकी इसी जादुई और बेबाक खूबी को सलाम किया है। जब बड़े-बड़े स्टार्स अपनी इमेज को लेकर डरते थे, तब नाना कभी सीरियस ड्रामा तो कभी अपनी बेहतरीन कॉमेडी से दर्शकों को चौंका रहे थे।
एक कभी न मिटने वाली विरासत
आज भले ही सोशल मीडिया पर मीम्स का दौर हो और नाना के पुराने डायलॉग्स पर इंस्टाग्राम रील्स बन रही हों, लेकिन उनका सम्मान आज भी फिल्म इंडस्ट्री में सर्वोच्च है। उन्होंने एक्टिंग को कभी एक ‘नौकरी’ की तरह नहीं देखा, बल्कि उसे अपने अंदर महसूस किया है। ‘काक-वाणी’ की रिपोर्ट के अनुसार, नाना की यह विरासत कभी खत्म नहीं होने वाली। तो अगली बार जब आप उदय भाई को “कंट्रोल उदय कंट्रोल” कहते हुए हंसें, तो याद रखिएगा कि इस लीजेंड के टैलेंट को काबू करना किसी के बस की बात नहीं है!
संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें