मिट्टी का चिराग और उम्मीद की रोशनी

अंधेरे की आहट

सोमपुर गाँव में रामू नाम का एक वृद्ध कुम्हार रहता था। उसके बनाए मिट्टी के बर्तन और दीये इतने खूबसूरत होते थे कि दूर-दूर से लोग उन्हें खरीदने आते थे। रामू का पूरा संसार उसके दस साल के पोते, आरव में बसता था। आरव भी अपने दादाजी की तरह मिट्टी को नया रूप देने का सपना देखता था। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने आरव की दोनों आँखों की रोशनी छीन ली।

आँखों की रोशनी जाते ही आरव का हंसता-खेलता जीवन अचानक थम सा गया। जो बच्चा दिन भर चाक के पास बैठा मुस्कुराता था, वह अब कमरे के एक अंधेरे कोने में गुमसुम बैठा रहता। उसके लिए दुनिया पूरी तरह काली हो चुकी थी। उसने मिट्टी को छूना भी बंद कर दिया और खुद को अपनी बदकिस्मती का शिकार मान लिया।

अदृश्य दुनिया में उम्मीद का स्पर्श

रामू अपने पोते को इस तरह टूटते हुए नहीं देख सकता था। उसने तय किया कि वह आरव के जीवन में फिर से उम्मीद की किरण जगाएगा। एक सुबह, रामू आरव के पास गया और उसका हाथ पकड़कर चाक के पास ले आया। उसने गीली मिट्टी आरव की हथेली पर रखी और उसके कानों में धीमे से कहा, “बेटा, बाहर का अंधेरा तुम्हारी आत्मा को नहीं ढक सकता। आँखें बंद होने से हुनर खत्म नहीं होता। जो रोशनी बाहर बुझ गई है, उसे अपनी उँगलियों के स्पर्श में तलाशो।”

आरव ने शुरुआत में झिझक दिखाई, लेकिन अपने दादाजी के अटूट विश्वास को देखकर उसने मिट्टी को थाम लिया। धीरे-धीरे, आरव ने अपनी उँगलियों के स्पर्श से मिट्टी को महसूस करना शुरू किया। अब उसकी आँखें उसके हाथ थे। वह मिट्टी की नमी और चाक की गति को अपने दिल से महसूस करने लगा।

अनोखा दीया और नई सुबह

महीनों के अभ्यास के बाद, दिवाली का त्योहार पास आ गया। आरव ने इस बार अपने हाथों से एक बेहद विशेष दीया बनाया। वह दीया दिखने में पारंपरिक दीयों से थोड़ा अलग था, लेकिन उसकी बनावट और स्पर्श में एक अनोखा अहसास था, जिसे केवल छूकर ही समझा जा सकता था।

गाँव की प्रदर्शनी में रामू ने आरव का बनाया हुआ वह दीया सबसे खास जगह पर रखा। जब लोगों को पता चला कि यह खूबसूरत दीया एक ऐसे बच्चे ने बनाया है जो देख नहीं सकता, तो हर कोई हैरान रह गया। एक कला-प्रेमी ने उस दीये को बहुत ऊँचे दाम में खरीदा और आरव से कहा, “इस दीये की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि इसे किसी की नजरों ने नहीं, बल्कि तुम्हारे हौसले ने तराशा है।” यह सुनकर आरव के गालों पर खुशी के आँसू छलक पड़े। आज उसने अपने अंधेरे पर जीत हासिल कर ली थी।

कहानी से सीख

नैतिक शिक्षा: जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो जाएँ, हमें कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। असली रोशनी हमारी आँखों में नहीं, बल्कि हमारे अटूट आत्मविश्वास और हौसले में होती है।

कागा जी