रामपुर के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का बारह साल का लड़का रहता था। आरव को चित्रकारी और मिट्टी की मूर्तियाँ बनाने का बहुत शौक था। उसकी छोटी-सी उँगलियों में जादू था, वह जिस मिट्टी को छूता, उसमें मानो जान फूँक देता था। लेकिन एक दुखद दुर्घटना में पटाखों के धमाके से आरव की आँखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई।
अंधेरे का गहरा साया
आँखों की रोशनी जाते ही आरव की दुनिया में सन्नाटा और अंधेरा छा गया। जो बच्चा कल तक रंगों से खेलता था, वह अब कमरे के एक अंधेरे कोने में चुपचाप बैठा रहता। उसने खाना-पीना छोड़ दिया और अपनी उँगलियों से मिट्टी को छूना भी बंद कर दिया। उसके माता-पिता उसका यह दुख देखकर अंदर से टूट चुके थे। गाँव के लोग भी यही कहते कि अब इस लाचार बच्चे का भविष्य अंधेरे में डूब गया है।
दादाजी का अनूठा पाठ
एक दिन आरव के दादाजी उसे गाँव के पास वाले एक सुंदर बगीचे में ले गए। दादाजी ने आरव का हाथ एक ताज़े खिले हुए गुलाब के फूल पर रखा और पूछा, “आरव, बताओ तुम्हें क्या महसूस हो रहा है?”
आरव ने उदास होकर कहा, “दादाजी, यह बहुत कोमल है और इसकी खुशबू बहुत प्यारी है।”
दादाजी ने उसे गले लगाया और बोले, “बेटा, दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ें सिर्फ आँखों से नहीं, बल्कि दिल से महसूस की जाती हैं। तुम्हारी आँखें चली गई हैं, लेकिन तुम्हारे हाथों का हुनर और तुम्हारे दिल की भावनाएँ आज भी तुम्हारे पास हैं।” दादाजी के इन शब्दों ने आरव के मन में सोई हुई उम्मीद की चिंगारी को फिर से जगा दिया।
मिट्टी से जीवन गढ़ने का सफर
उस दिन के बाद आरव ने अपनी बेबसी पर रोना छोड़ दिया। उसने अपनी उँगलियों से स्पर्श करके चेहरों की बनावट और हवा की सरसराहट को महसूस करना शुरू किया। वह फिर से मिट्टी उठाकर मूर्तियाँ बनाने लगा। अब उसकी मूर्तियों में केवल बाहरी आकार नहीं, बल्कि सच्ची भावनाएँ झलकती थीं। वह जब भी कोई मूर्ति बनाता, उसमें अपने दिल की उम्मीद उकेर देता।
कुछ ही सालों में आरव की बनाई मूर्तियों की सुंदरता की चर्चा पूरे राज्य में होने लगी। शहर में एक बड़ी कला प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, जहाँ आरव की बनाई मूर्तियाँ भी रखी गईं।
सफलता की नई सुबह
प्रदर्शनी में एक प्रसिद्ध कला पारखी ने आरव द्वारा बनाई गई ‘माँ और बच्चे’ की मूर्ति को देखा। उस मूर्ति में वात्सल्य का ऐसा रूप था कि देखने वालों की आँखों में आँसू आ गए। जब लोगों को पता चला कि यह खूबसूरत मूर्ति एक दृष्टिहीन युवक ने बनाई है, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। आरव को उस प्रदर्शनी का सर्वश्रेष्ठ कलाकार चुना गया।
कहानी की सीख
सीख: जीवन में आई कोई भी रुकावट हमारे हौसले से बड़ी नहीं हो सकती। जब बाहर की आँखें बंद हो जाती हैं, तब हमें अपने अंदर के आत्मविश्वास की रोशनी को जगाना चाहिए। अगर मन में लगन हो तो अंधेरा भी सफलता के रास्ते की रुकावट नहीं बन सकता।