दिल्ली का डंडा, विदेशी चश्मा और ‘जेन-जी’ के लोकतंत्र-रक्षक!

अहा! अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारिता का भी क्या कहना। जापान के प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘निकेई एशिया’ ने अपनी दिव्य दृष्टि से भारत के लोकतंत्र का वो नया अवतार ढूंढ निकाला है, जिसे देखने में हमारी स्थानीय पुलिस की दूरबीनें भी नाकाम हो गईं। अखबार का फरमान है कि दिल्ली में सरकार की ‘सख्ती’ और ‘क्रैकडाउन’ ने देश की ‘जेन-जी’ (Gen Z) पीढ़ी को रातों-रात भारतीय लोकतंत्र का परम रक्षक बना दिया है।

रील्स से क्रांति तक का सुनहरा सफर

सोचिए, जिस पीढ़ी के बारे में हमारे देश के बुजुर्गों का मानना था कि इनका पूरा जीवन इंस्टाग्राम पर ‘रील’ बनाने, ‘ओट्स मिल्क लेटे’ की चुस्कियां लेने और आईफोन के फिल्टर बदलने में बीत जाएगा, वो अब विदेशी मीडिया के अनुसार लोकतंत्र की ढाल बनकर खड़ी है। धन्य है दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार का प्रशासनिक डंडा! अगर वे सड़कों पर कड़ाई न दिखाते, तो बेचारी जेन-जी को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर डालने के लिए ‘एस्थेटिक’ और ‘क्रांतिकारी’ कंटेंट कैसे मिलता?

वाटर कैनन और कैनवा डिज़ाइन का अनूठा संगम

विदेशी पत्रकारों की नजर में, हर वो नौजवान जो किसी विरोध प्रदर्शन में एक रंग-बिरंगा पोस्टर लेकर खड़ा है (जिसका फॉन्ट ‘कैनवा ऐप’ से ध्यानपूर्वक चुना गया है), वह सीधे लोकतंत्र को तानाशाही से बचा रहा है। सरकार सोचती थी कि लाठी और धारा 144 से लोग घर बैठ जाएंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे तो इस पीढ़ी को ‘मेन कैरेक्टर एनर्जी’ का मुफ़्त पासपोर्ट दे रहे हैं। अब तो पुलिस की आंसू गैस का गोला भी इनके लिए एक ‘सिनेमैटिक शॉट’ से कम नहीं है।

लोकतंत्र बचेगा या सिर्फ फॉलोअर्स बढ़ेंगे?

‘काक-वाणी’ का मानना है कि यह भारत के इतिहास की सबसे ‘हाइ-टेक’ क्रांति है। यहाँ संविधान की रक्षा करना और साथ ही सही ‘हैशटैग’ ट्रैंड कराना, दोनों को समान रूप से पवित्र कर्तव्य माना जाता है। हालाँकि, निकेई एशिया के विद्वान पत्रकार शायद यह दर्ज करना भूल गए कि जैसे ही मोबाइल का इंटरनेट बंद होता है या वाई-फाई का सिग्नल कमजोर पड़ता है, यह महान ‘क्रांति’ रीचार्ज होने तक स्थगित हो जाती है।

खैर, केंद्र सरकार को बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने बिना किसी शिक्षा बजट के हमारी युवा पीढ़ी में ‘नागरिक बोध’ की अलख जगा दी। और विदेशी मीडिया का भी कोटि-कोटि धन्यवाद, जो सात समंदर पार बैठकर हमारी रील्स में भारत के लोकतंत्र का स्वर्णिम भविष्य देख लेता है। अब देखना यह है कि यह ‘जेन-जी’ लोकतंत्र को बचाती है या फिर अगला ‘ट्रेंडिंग ऑडियो’ आते ही अपने इस मिशन को म्यूट पर डाल देती है।


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी