‘दीपावली’ या ‘दिवाली’? मलेशिया में एक मात्रा की जंग और नेताओं का ब्रह्मांडीय संकट!

दुनिया में गरीबी, महंगाई, पर्यावरण और बेरोजगारी जैसे छोटे-मोटे मुद्दे तो चलते ही रहते हैं। इन पर ध्यान देकर नेता अपना कीमती समय क्यों बर्बाद करें? लेकिन जब ‘दीपावली’ में ‘प’ के बाद बड़ी ‘आ’ की मात्रा लगेगी या ‘दिवाली’ कहकर काम चलाया जाएगा, इस पर महायुद्ध छिड़ जाए, तो समझिए कि राजनीति अपने मोक्ष को प्राप्त कर चुकी है। जी हां, ‘द डिप्लोमैट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मलेशिया में ‘दीपावली’ बनाम ‘दिवाली’ के नामकरण को लेकर भारी राजनीतिक संग्राम मच गया है। अब संयुक्त राष्ट्र संघ को वहां शांति सेना भेजनी चाहिए या नहीं, यह गंभीर चिंतन का विषय है।

एक मात्रा की खातिर दांव पर लगी मलेशियाई सियासत

काक-वाणी के विशेष विश्लेषक जब इस अंतर्राष्ट्रीय खबर से रू-ब-रू हुए, तो हमारी आंखों में गर्व के आंसू आ गए। अब तक हमें लगता था कि सिर्फ हमारे देश के नेता ही शहरों के नाम बदलने और शब्दों के हिज्जे (Spelling) ठीक कराने में अपने जीवन का मकसद ढूंढते हैं। लेकिन मलेशियाई नेताओं ने तो कमाल ही कर दिया! उन्होंने यह साबित कर दिया कि दुनिया चाहे कितनी भी आधुनिक हो जाए, नेताओं की बौद्धिक क्षमता का स्तर हर जगह एक जैसा ही रहता है।

वहां एक पक्ष का तर्क है कि ‘दीपावली’ ही शुद्ध, पौराणिक और सांस्कृतिक रूप से सही शब्द है। वहीं ‘दिवाली’ शब्द का प्रयोग करना मानो अपनी संस्कृति का अनादर करना है। अब बेचारा मलेशियाई नागरिक दीया हाथ में लिए इस डर से कांप रहा है कि अगर उसने गलती से ‘दिवाली हैप्पी’ कह दिया, तो क्या पुलिस उसे भाषा की मर्यादा तोड़ने के जुर्म में उठाकर जेल में डाल देगी?

विकास के मुद्दे गायब, वर्तनी पर महासंग्राम

वास्तव में, विश्व के तमाम नेताओं का मूल मंत्र एक ही है—जब जनता अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और शिक्षा पर सवाल पूछने लगे, तो उन्हें किसी शब्द की वर्तनी (Spelling) और व्याकरण के चक्कर में उलझा दो। मलेशियाई नेताओं को अचानक यह ज्ञान प्राप्त हुआ है कि देश की सारी समस्याओं की जड़ असल में ‘अंकल’ और ‘आंटी’ के बोलने का तरीका नहीं, बल्कि त्यौहार का ‘उच्चारण’ है।

काक-वाणी की तरफ से ऐसे दूरदर्शी नेताओं को कोटि-कोटि नमन। अब बस इंतज़ार इस बात का है कि कल को कोई नया नेता यह फरमान जारी कर दे कि ‘समोसे’ को ‘आलू-भरे-त्रिकोण’ क्यों नहीं कहा गया! इसलिए प्रिय पाठकों, अगली बार जब आप त्योहार मनाएं, तो ज़रा संभलकर बोलिएगा, क्योंकि आपकी एक मात्रा की चूक किसी पड़ोसी मुल्क में सरकार गिरा सकती है!


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कागा जी