सुनो-सुनो, फिल्म प्रेमियों! ‘काक-वाणी’ के चटपटे गलियारे में आपका स्वागत है। दशहरा यानी विजयादशमी का त्यौहार आ चुका है, और जब बात बुराई पर अच्छाई की जीत की हो, तो भला हमारा सिनेमा पीछे कैसे रह सकता है? वैसे तो बॉलीवुड में कई त्यौहार मनाए जाते हैं, लेकिन साउथ सिनेमा जिस भौकाल और भव्यता के साथ दशहरे के जज्बे को पर्दे पर उतारता है, उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता!
‘दसरा’: कच्चा, खरा और सीधे दिल को छूने वाला टशन
अगर आपने नेचुरल स्टार नानी की फिल्म ‘दसरा’ (Dasara) नहीं देखी, तो फिर क्या देखा? तेलंगाना के गोदावरीखानी कोयला खदानों की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म दशहरे के त्यौहार और उसके सांस्कृतिक महत्व को बहुत गहराई से दिखाती है। फिल्म का क्लाइमेक्स और नानी का खूंखार अवतार बिल्कुल वैसा ही रोमांच देता है, जैसा रावण दहन के वक्त आतिशबाजी देखकर मिलता है। बुराई का अंत और अच्छाई का परचम, इस फिल्म की असली आत्मा है!
‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’: जब रचा गया इतिहास
एस.एस. राजामौली की ‘बाहुबली 2’ को कौन भूल सकता है? फिल्म में प्रभास का किरदार ‘महेंद्र बाहुबली’ जब भल्लालदेव का अंत करता है, तो वो दृश्य किसी विशालकाय ‘रावण दहन’ से कम नहीं लगता। फिल्म में बुराई के प्रतीक बने भल्लालदेव के अहंकार को जिस तरह ध्वस्त किया जाता है, वह सीधे तौर पर विजयादशमी के संदेश को बयां करता है। भव्य सेट, एक्शन और धर्म-अधर्म की यह जंग दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती है।
‘कांतारा’ और ‘RRR’: धर्म और न्याय की गूंज
साउथ की फिल्में सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूती से पकड़कर रखती हैं। ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ (Kantara) में दैव कोला परंपरा के जरिए अधर्म का नाश और न्याय की जीत दिखाई गई है, जो दशहरे की मूल भावना से मेल खाती है। वहीं, ‘RRR’ के क्लाइमेक्स में राम चरण का भगवान राम वाले अवतार में धनुष-बाण लेकर दुश्मनों का सफाया करना, सीधे तौर पर रावण वध की याद दिलाता है।
काक-वाणी की राय
साउथ इंडियन सिनेमा ने यह साबित कर दिया है कि जब पौराणिक कथाओं, संस्कृति और आधुनिक सिनेमा का संगम होता है, तो इतिहास बनता है। तो इस दशहरे पर जलेबी-फाफड़ा खाइए और साउथ की इन ब्लॉकबस्टर फिल्मों के साथ विजयादशमी का असली जश्न मनाइए!
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