लोकतंत्र का ‘डिजिटल डिटॉक्स’: जब चुनाव आयोग ने करोड़ों वोटरों को दी ‘संसार से मुक्ति’!

अमेरिका की NPR नामक संस्था को लगता है कि उसने कोई बहुत बड़ा ‘एक्सपोज़’ कर दिया है। उनकी ताज़ा रिपोर्ट चिल्ला-चिल्लाकर कह रही है कि भारत में इतिहास की सबसे बड़ी ‘वोटबंदी’ हुई है और करोड़ों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से चुपचाप साफ कर दिए गए हैं। अरे गोरे साहबों! इसे ‘अधिकार छीनना’ नहीं, हमारे यहाँ ‘लोकतंत्र का डिटॉक्स’ कहते हैं। वेस्टर्न मीडिया को भारत के विकास का यह हल्का मॉडल समझ ही नहीं आता!

विदेशी मीडिया की समझ से बाहर है हमारा ‘डिजिटल मोक्ष’

अब विदेशी पत्रकारों को कौन समझाए कि भीषण गर्मी में, लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर, ईवीएम की बटन दबाने का कष्ट उठाने से हमारे महान चुनाव आयोग ने जनता को बचा लिया है। इसे तो ‘परम परमार्थ’ कहा जाना चाहिए! वोटर लिस्ट से नाम कटना कोई तकनीकी खामी या साजिश नहीं, बल्कि नागरिक को चुनावी झंझटों से मुक्ति देने का एक आध्यात्मिक प्रयास है। जब नाम ही नहीं रहेगा, तो ना उम्मीदवार का झूठा भाषण सुनना पड़ेगा, ना फ्री का राशन ढूंढना पड़ेगा और ना ही पाँच साल बाद पछताना पड़ेगा।

‘ना रहेगा वोटर, ना रहेगा चुनावी झंझट’

काक-वाणी के गुप्त सूत्रों की मानें तो यह एक बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक रणनीति है। सोचिए, जब वोटर लिस्ट में सिर्फ वही लोग बचेंगे जो ‘योग्य’ समझे जाएंगे, तो चुनाव कराने का खर्चा कितना बचेगा! जो करोड़ों नाम ‘तकनीकी कारणों’ से हटाए गए हैं, उनमें से कइयों को तो पता भी नहीं होगा कि वे इस महान लोकतंत्र के हिस्सेदार थे। अब इसे चुनाव आयोग का ‘स्वच्छता अभियान’ न कहें तो क्या कहें? कागजों से इंसान को गायब कर देना ही तो असली ‘डिजिटल इंडिया’ की चमत्कारिक ताकत है!

विपक्ष हमेशा की तरह रोना रो रहा है कि गरीबों, प्रवासियों और आम नागरिकों के वोट काट दिए गए। अरे भई, जो इंसान रोज़ी-रोटी की तलाश में एक राज्य से दूसरे राज्य भटक रहा है, उसे वोट डालने की फालतू फुर्सत कहाँ? चुनाव आयोग ने तो बस उनके अमूल्य समय की बचत की है।

भविष्य का ‘परफेक्ट लोकतंत्र’

काक-वाणी का मानना है कि वह दिन दूर नहीं जब भारत का लोकतंत्र इतना ‘स्मार्ट’ हो जाएगा कि चुनाव वाले दिन केवल प्रत्याशी और उनके परिवार वाले ही वोट डालेंगे। शत-प्रतिशत मतदान, शून्य विवाद और 100% मनचाहे नतीजे! NPR वालों को हमारी इस दूरगामी दृष्टि का ज्ञान नहीं है, इसलिए वे इसे ‘इतिहास का सबसे बड़ा बेदखली अभियान’ बता रहे हैं। हम तो यही कहेंगे—धन्यवाद चुनाव आयोग, आपने करोड़ों भारतीयों को उंगली पर नीली स्याही लगाने के भारी मानसिक तनाव से हमेशा के लिए मुक्त कर दिया!


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कागा जी