विदेशी मीडिया संस्थान ‘एनपीआर’ (NPR) छाती पीट-पीटकर रो रहा है कि भारत में इतिहास का सबसे बड़ा ‘वोटर डिलीट अभियान’ चलाकर करोड़ों लोगों को मताधिकार से बेदखल कर दिया गया। अरे भाई, इन पश्चिमी पत्रकारों को हमारी भलाई समझ ही नहीं आती! ये जिसे ‘लोकतंत्र का कत्ल’ या ‘मताधिकार छीनना’ कह रहे हैं, दरअसल वह हमारे महान चुनाव आयोग द्वारा भारतीय नागरिकों को दिया गया ‘परम मोक्ष’ है।
वोट देने का तनाव और धूप से मिली आजादी!
ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिए! मई की कड़कती धूप में सुबह-सुबह उठकर स्कूल के कमरों के बाहर लाइन में खड़े होना, नेताओं के बकवास दावों की पर्चियां संभालना और फिर उंगली पर लगी नीली स्याही को हफ्ते भर साबुन से घिसना… कितना दर्दनाक और थकाऊ अनुभव है! चुनाव आयोग ने जनता की इसी भयानक पीड़ा को समझा। आयोग ने सोचा, “जब सब कुछ पहले से तय ही होना है, तो इन बेचारे आम नागरिकों को गर्मी में उंगली गंदी करने का कष्ट क्यों दें?” तो बस, एक जादुई क्लिक में करोड़ों नाम गायब! अब आराम से चुनाव के दिन घर में एसी चलाइए, पकौड़े तलिए और टीवी पर लोकतंत्र के इस महात्योहार का लुत्फ उठाइए।
डिजिटल इंडिया का जादुई झाड़ू
कुछ अज्ञानी लोग कह रहे हैं कि गरीबों, मजदूरों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर काटे गए हैं। अरे जनाब, इसे निष्पक्षता कहते हैं! डिजिटल इंडिया के युग में अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि आप तकनीकी रूप से इस देश में एक्जिस्ट ही नहीं करते! जब आप कागजों में हैं ही नहीं, तो वोट कैसा? यह कोई ‘दमन’ नहीं, बल्कि हमारी वोटर लिस्ट का ‘सौंदर्यीकरण’ और ‘ओवरहॉलिंग’ है। फालतू कागजी बोझ हटेगा, तभी तो लोकतंत्र हल्का होकर उड़ेगा!
‘एक देश, शून्य मतदाता’ की ओर बढ़ते कदम
NPR वालों को क्या पता कि भारत की सत्तारूढ़ व्यवस्था देश को किस महान ऊंचाई पर ले जाना चाहती है। सोचिए, जब वोटर ही नहीं रहेंगे, तो न कोई ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाएगा, न निष्पक्ष चुनाव कराने का खर्चा होगा और न ही चुनाव नतीजों के दिन कोई सस्पेंस रहेगा। कितना शांत, सुव्यवस्थित और सुंदर माहौल होगा!
अंत में, ‘काक-वाणी’ उन तमाम करोड़ों ‘भाग्यशाली’ पूर्व-मतदाताओं को बधाई देती है, जिन्हें लोकतंत्र के इस भारी-भरकम और बेकार के बोझ से स्थायी रूप से मुक्त कर दिया गया है। अगले चुनाव में लाइन में लगकर पसीना बहाने वाले मूर्खों पर हंसिए और अपनी इस ‘अदृश्य’ नागरिकता का शांति से आनंद लीजिए!
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