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खोया हुआ समय विक्रम ने अपनी लाइफ विथ कैमरा के

खोया हुआ समय

विक्रम ने अपनी लाइफ विथ कैमरा के साथ समाप्त की और अपने घर की तरफ बढ़ा। रास्ते में उसने एक छोटी सी बच्ची को देखा, जो रोते हुए दौड़ रही थी। विक्रम उसे पकड़ लेना चाहता था, लेकिन वह रोई जा रही थी और दूर जा रही थी। उसके बाद वह अपने घर गया और सो गया।

जब वह सो रहा था, उसे एक सफेद रॉब में दो लोगों को देखा जो उसके सोने के कमरे में प्रवेश कर रहे थे। विक्रम अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था। वह ऊंची संवेदनशीलता वाला व्यक्ति नहीं था, इसलिए वह सोच नहीं सकता था कि क्या करना है। उसने अपनी आंखें बंद कर ली और उस समय अनुभव किया कि उसका समय रुक जाता है।

जब उसने अपनी आंखें खोलीं, तो वह एक सेंध पर होता हुआ पाया गया था जो कि उसने कभी देखा नहीं था। उसे इस विचित्र परिस्थिति से विस्मित होने का समय नहीं था क्योंकि शीशे में उसका रूप देखने वाले व्यक्ति अब दूसरे कमरे में थे और उस रूम में एक उड़ान नियंत्रक जर्नी शुरू कर रहा था।

धूम्रपान और तलवारें लेकर उसे लाइटर में धुआंधार करते लोग उसे शॉट दे रहे थे। विक्रम ने ज्ञान गणेश बंदगी, जिसे उसने खरीदा था, को ढक दिया।

उसने दोबारा अपनी आंखें बंद कर लीं और सोचा कि यदि उसे इस दावे का सामना करना होगा तो वह खुद को कैसे संभालेगा। फिर उसने फिल्म में अपना ही रूप देखा। तब उसने समझा कि उसे क्या करना होगा।

जो लोग उसकी फोटोग्राफी लेने आए थे, वे कर्मों का दंशन से बचने के लिए उसे आत्मिक ज्ञान की आवश्यकता थी। उसे पता था कि यह उसका मौका है और वह इसका बस्ता नहीं फेंक सकता है। वह अपनी आंखें फिर से बंद कर ली और दूरदर्शन जैसी तकनीक का उपयोग करते हुए अपने आप को संभालने का प्रयास करने लगा।

उसके सामने आमेरिका की एक छोटी खुशी थी, जो अपने घर और कर्मचारियों को वापस लाना चाहती थी। उसे अपने को उठाना पड़ा क्योंकि एक तलवार उसके सिर पर लगी थी। उसने उसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी ताकत खत्म हो गई थी। इसलिए वह बस सहमा हूआ खड़ा था।

खुशी ने उसे मोटीराम माल्या के साथ एक पार्टी में वापस भेज दिया। उसने आपने वापसी के लिए मदद करने का उससे पूछा। मोटीराम माल्या ने उसे एक पाथा दिया जो उसे रात होने से पहले वापस ले आएगा।

उस रात विक्रम अपनी छत पर आकाशगंगा के संग पहली बार बिछाया गया था। वह अपनी नेत्रों से इस विस्तृत, प्राकृतिक आकृति को गौर से देख रहा था। उसने सोचा कि वह किसी चीज के बदले में भगवान से क्या मांगता है।

वह जो कुछ भी मांग रहा था, वह उसके पास मौजूद नहीं था। वह सोचता था कि क्या समय उसके साथ खेल रहा था। यह उसे अजीब लग रहा था क्योंकि वह सिर्फ आगे बढ़ने वाला था, जबकि समय उसके साथ फिर नहीं लौट सकता था।

विक्रम बेहद सोचता था कि कैसे उसे अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए उपयोग में ले सकता है। समय को बचाने की बजाय वह उसे बेहतर तरीके से व्यतीत करने का निर्णय ले सकता था। वह जानता था कि कुछ समय के बाद वह फिर से वहीं था जहां वह शुरू हुआ था, और उसने अपने आप को कैसे संभाला जाना चाहिए।

वह सोचता था कि यदि वह लोगों से धन ही नहीं मांगता और अपने समय को एक अच्छी तरीके से व्यतीत करता तो उसे दृष्टिगत रुप से अधिक सहायता मिलती।

वह समय से नहीं छिन्न विचार बन गया था। उसे जो कुछ मिल रहा था, वह लेता था। वह मौजूदा स्थिति के साथ हैपी था और उसे पता था कि वह इस माहौल में से निकलने वाला है।

समय तो खो गया था लेकिन विक्रम ने एक नया जीवन शुरू किया था। उसने समय के लिए नहीं बल्कि समय के साथ मिलने के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया था। उसने सीखा कि समय एक घड़ी की तरह होता है, न कि एक कागज की तरह, और इस तरह उसने खोया हुआ समय में से अपने भविष्य को चुन लिया।

कागा जी

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