डोनाल्ड ट्रम्प की ‘हाउडी’ से ‘हटाओ जी’ तक: अल-जजीरा का महान ज्ञानोदय!

अरे वाह! अल-जजीरा ने एक बार फिर दुनिया को अपना महान ‘अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान’ बांटा है। उन्हें अचानक अपनी दूरबीन से दिख गया है कि भारतीय लोग डोनाल्ड ट्रम्प साहब से थोड़े खफा-खफा से हैं। जी हां, वही ट्रम्प चाचा, जिनके लिए गुजरात में ‘नमस्ते ट्रम्प’ का भव्य मेला सजाया गया था और स्टेडियम में दुनिया का सबसे बड़ा तालियों का शोर मचाया गया था। अब जबकि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव सिर पर हैं, अल-जजीरा की आंखों में यह गंभीर आंसू छलक आया है कि भारत का दिल ट्रम्प दादा के लिए अब पहले जैसा नहीं धड़क रहा।

‘हाउडी मोदी’ के ढोल की हवा किसने निकाली?

सच्चाई तो यह है कि भारतीय जनता का दिल किसी विदेशी नेता के प्रेम में लंबे समय तक तब तक नहीं धड़कता, जब तक कि उसमें टैरिफ कट या H-1B वीजा की चाशनी न घुली हो। ट्रम्प साहब जब सत्ता में थे, तब वे सुबह भारत को “टैरिफ किंग” कहकर कोसते थे और शाम को ‘हाउडी मोदी’ के मंच पर आकर भाईचारे की झप्पी दे जाते थे। अब जब वे कुर्सी से बाहर हैं और दोबारा सत्ता के सपने देख रहे हैं, तो अल-जजीरा को लगता है कि भारतीय उनके लिए व्रत रखना छोड़ चुके हैं। भाई साहब, हमारे देश में राजनीति का प्यार सिर्फ ‘व्यापार’ और ‘वीजा’ के डिस्काउंट पर निर्भर करता है!

अल-जजीरा की दूरबीन और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी

कतर के वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर अल-जजीरा के विश्लेषकों ने शायद भारतीय ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के ट्रेंड्स पढ़ना छोड़ दिए हैं। वरना उन्हें पता होता कि भारतीय ट्रम्प से नाराज नहीं हैं, बस थोड़े व्यावहारिक हो गए हैं। जब जो बाइडन साहब आए, तो हमने उनसे चाय-पानी पूछ लिया; अगर कल को कोई तीसरा आ जाएगा, तो हम उसके गले भी लग जाएंगे। ट्रम्प चाचा का मूड स्विंग और उनके अटपटे बयान अब भारतीय अंकलों के लिए शाम के चाय-समोसे के साथ केवल मनोरंजन का साधन बचे हैं।

अल-जजीरा का यह रोना कि “भारत का ट्रम्प से मोहभंग हो गया है”, वैसा ही है जैसे कोई कहे कि धूप निकलने के बाद लोगों ने छाता तानना बंद कर दिया! अरे ज्ञानी बाबाओं, चुनाव अमेरिका में हैं, और पेट में मरोड़ आपको भारत के नाम पर उठ रही है? ट्रम्प का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा अब भारतीयों के लिए केवल ‘मेक माय वीजा ईजी अगेन’ बनकर रह गया है। खैर, राजनीति की इस नौटंकी पर ‘काक-वाणी’ तो बस यही कहेगी: ट्रम्प बाबू, भारत का दिल बहुत उदार है, बस जरा वीजा का कोटा बढ़ा दीजिए, यह खटास एक मिनट में जलेबी जैसी मिठास में बदल जाएगी!


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कागा जी