लोकतंत्र बचाओ, पुरानी मतदाता सूची लाओ: राहुल गांधी का नया महासंग्राम!

देश के प्रिय युवराज और हमारे विपक्ष के परम आदरणीय नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत में लोकतंत्र पर जब-जब संकट आएगा, वे सीधे प्रशासनिक कागजों से टकरा जाएंगे। इस बार लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला किसी विदेशी ताकत ने नहीं, बल्कि भारत के चुनाव आयोग ने किया है। अपराध क्या है? मतदाता सूची का पुनरीक्षण (Voter Roll Revision)। जी हां, सही सुना आपने! चुनाव आयोग की यह जुर्रत कि वह वोटर लिस्ट को अपडेट करे, विपक्ष की नजर में लोकतंत्र पर सीधा हमला है।

जब कागजों की सफाई बन जाए ‘लोकतंत्र की हत्या’

अब आप ही सोचिए, अगर मतदाता सूची से उन लोगों के नाम हटा दिए गए जो इस दुनिया को छोड़कर जा चुके हैं, या जो तीन अलग-अलग राज्यों में तीन-तीन बार वोट डालने का ‘महान’ कार्य करते हैं, तो विपक्ष चुनाव कैसे लड़ेगा? काक-वाणी के हमारे विशेष सूत्रों के अनुसार, राहुल जी का मानना है कि ‘जो मतदाता अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनका भी लोकतांत्रिक अधिकार बनता है।’ आखिर जो इंसान जिंदा ही नहीं है, वह सरकार से कोई तीखा सवाल भी नहीं पूछेगा! फिर भला ऐसे आदर्श मतदाताओं का नाम सूची से हटाने की जल्दबाजी क्यों?

बीबीसी का तड़का और विपक्ष का क्रूर संघर्ष

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान बीबीसी ने भी इस महा-संकट को भांप लिया है और खबर छापी है कि भारत का विपक्ष मतदाता सूची के सुधार के खिलाफ लामबंद हो रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन इतना ऐतिहासिक है कि खुद ‘इतिहास’ भी थोड़ा शरमा कर कोने में बैठ गया है। विपक्षी दलों का स्पष्ट तर्क है कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार का सुधार या पारदर्शिता लाना असंवैधानिक है। चुनाव आयोग की यह दुस्साहस भरी हरकत कि वोटर लिस्ट साफ-सुथरी हो, सीधे-सीधे विपक्ष की चुनावी रणनीति पर पानी फेरने जैसी है।

भविष्य की रणनीति: ‘न रहेगी वोटर लिस्ट, न होगी हार’

ईवीएम को तो पहले ही ‘बेईमान’ घोषित किया जा चुका है, अब बेचारी मतदाता सूची की बारी है। अगर कल को चुनाव आयोग यह नियम बना दे कि वोटिंग सुबह 8 बजे शुरू होगी, तो विपक्ष शायद इस समय सारणी के खिलाफ भी यह कहते हुए धरने पर बैठ जाए कि ‘सुबह 8 बजे ही क्यों, हमारे नेता उस वक्त चाय की चुस्कियां ले रहे होते हैं!’

अंत में, काक-वाणी की तरफ से चुनाव आयोग को एक ही सलाह है—हे चुनाव आयोग, थोड़ा तरस खाओ! अगर मतदाता सूची इतनी साफ और फर्जी वोटों से मुक्त हो गई, तो फिर चुनाव हारने के बाद हमारे राहुल जी और पूरा विपक्ष अपनी हार का ठीकरा किस पर फोड़ेगा?


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कागा जी