अहा! ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ का पन्ना धन्य हो गया। सोनिया गांधी ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि भारत के सबसे शक्तिशाली राजनीतिक घराने की बहू बनना कितना ‘भयावह’ था। उन्हें हमेशा लगता था कि उनके पति की हत्या कर दी जाएगी। वाह! क्या भावनात्मक पटकथा है। ‘काक-वाणी’ का कड़वा कांव-कांव आज इसी ‘दहशत’ और ‘त्याग’ के भव्य शोकेस को नमन करता है।
डर इतना था कि सत्ता छोड़ना ही भूल गए!
भारतीय राजनीति भी क्या अजीब चीज है। इंसान को पता है कि आगे खतरा है, जान का जोखिम है, फिर भी वह उसी खतरे के बीच 10 जनपथ का आलीशान महल बनाकर रहने के लिए बेताब रहता है। सोनिया जी को डर था कि राजीव जी मार दिए जाएंगे। डर इतना गहरा था कि इस डर के साए में उन्होंने खुद 10 साल तक रिमोट कंट्रोल से देश की सरकार चलाई। इतना ही नहीं, अब अपने सुपुत्र को भी उसी ‘खतरनाक’ कुर्सी पर बैठाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। इसे कहते हैं सच्चा मातृप्रेम! डर भले ही लगे, लेकिन राजशाही की गद्दी हाथ से नहीं जानी चाहिए।
विदेशी मीडिया, देसी हमदर्दी और ‘त्याग’ का कार्ड
देशी नेताओं की एक पुरानी परंपरा रही है—घर का दुखड़ा हमेशा विदेशी मीडिया के सामने ही रोया जाता है। लंदन के वातानुकूलित दफ्तर में बैठकर ‘द गार्जियन’ के गोरे पत्रकार को यह समझाना कितना सुखद होता है कि कैसे एक इतालवी कन्या ने भारत के सबसे ताकतवर परिवार में आकर केवल ‘दर्द और खौफ’ सहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर यह राजनीति इतनी ही जानलेवा और डरावनी थी, तो इस परिवार ने कभी राजनीति से संन्यास लेने का विचार क्यों नहीं किया? क्या ‘त्याग की देवी’ का तमगा केवल विदेशी कैमरों के सामने ही चमकता है?
‘कुर्सी का खौफ’ या सहानुभूति की पुरानी फसल?
काक-वाणी की पैनी नजर कहती है कि यह सब सहानुभूति का वोट बैंक हरा-भरा रखने की कवायद है। जब-जब राजनीति में सन्नाटा छाने लगता है, त्याग, बलिदान और पुरानी त्रासदियों की फाइलों से धूल झाड़ ली जाती है। अगर राजनीति इतनी ही खौफनाक और जानलेवा है, तो फिर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को इस ‘खूनी खेल’ में क्यों धकेला जा रहा है? कम से कम अपने बच्चों को तो इस खौफ से बचा लीजिए माते!
खैर, हम तो कौवे हैं, हमारी बात में कड़वाहट होना लाजमी है। लेकिन देश की जनता भी समझती है कि असली डर उस आम नागरिक को लगता है, जो इन शाही खानदानों के बयानों, उनके ड्रामे और वंशवादी राजनीति के बोझ तले रोज पिसने पर मजबूर है। बाकी ‘द गार्जियन’ को एक मसालेदार इंटरव्यू मिल गया, इसके लिए उन्हें बधाई!
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