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Story खेलना एक बच्चा था जो बहुत ज्ञानी था। उसे

Story Title: खेलना

एक बच्चा था जो बहुत ज्ञानी था। उसे अपने अध्ययन में बहुत रुचि थी। पर उसके मन में एक सवाल हमेशा उठता रहता था कि उसे खेलना क्यों नहीं मिलता? उसे खेलने का बहुत मन था, पर हमेशा बार-बार वह अपने अध्ययन में बिजी रहता था।

इस बच्चे के घर के पास एक खेल का मैदान था जहां बच्चे आसानी से खेल सकते थे। बच्चा खिलौनों के बारे में सोचने लगा और फिर उसने फैसला कर लिया कि वह कुछ खिलौने खरीदेगा।

अगले दिन, स्कूल के बाद, उसने अपने अंकों की टोकरी को ले जाकर कुछ खिलौनों की दुकान से खिलौने खरीद लिए। उसमें एक फुटबॉल, एक क्रिकेट सेट, एक बैडमिंटन सेट और कुछ और बहुत सी बातें शामिल थीं।

उसने घर आकर अपने दोस्तों को खेलने के लिए बुलाया। सभी उससे खुश थे और उसके साथ खेलने के लिए तैयार थे। वे सारे बच्चे मैदान में गए और खेलना शुरू कर दिया।

बच्चों के अंदर की खेलने की आग सबको जला रही थी। वे सब बहुत अच्छी तरह से खेल रहे थे। लेकिन बच्चा थोड़ा विकल्प से अलग था।

खेलने के दौरान वह कभी-कभी सभी खिलौनों से अलग हो जाता था तथा खेलने के अलावा कुछ और भी करता रहता था।

इस बच्चे के खेलने का तरीका थोड़ा अलग था। वह न केवल फुटबॉल खेलना चाहता था, बल्कि वह दूसरे बच्चों से खेलने का तरीका भी सीखना चाहता था।

बच्चे खेलते खेलते थक जाते थे लेकिन यह बच्चा नहीं मानता था कि उसे थकने का समय आ गया है। वह हमेशा तैयार रहता था एवम नई योजनाओं का निर्माण करता रहता था।

वह हमेशा अलग रहता था। उसे उन खेलों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जो अन्य बच्चे खेलते थे। इससे वह सबसे अलग नहीं लगता था, लेकिन अभी भी वह शामिल रहता था।

उस बच्चे ने लगभग कई दिन खेलने के तरीके बदले लेकिन उसके रूचि क्षेत्र में कुछ नहीं बदला। उसे अध्ययन करने में हमेशा ही रुचि थी लेकिन चीजें उससे अलग थीं।

एक दिन, उस बच्चे को मैदान में खेलते देख उसके पिता ने उस से पूछा कि क्या सब कुछ ठीक है? बच्चा बताया कि वह खेलना चाहता है पर वह अलग तरह से खेलता है। उसके पिता ने उसे समझाया कि वह अपनी रूचि के अनुसार कुछ भी कर सकता है, बस अपने दोस्तों का सम्मान करते हुए।

बच्चा कुछ सोच रहा था। उसे एक विचार आया कि वह खेलता नहीं है लेकिन अध्ययन करते समय उसे निश्चित रूप से एक समय निर्धारित करना चाहिए जब वह खेलेगा। उसने यह सोचा कि वह एक दिन खेलने के लिए निश्चित रूप से समय निर्धारित करेगा।

फिर उसने देखा कि उसकी नई खेलने की दृष्टि उसके साथ खेलने आए सभी बच्चों की नज़रें आकर्षित कर ने लगी हैं। वे सब उसे समस्त इरादों को संभव तरीकों से सफलतापूर्वक पूरा करने की दिशा में प्राधिकरण देने के लिए तैयार थे।

आखिरकार, बच्चा एक समय निर्धारित कर लिया कि एक घंटा उसे अपने दोस्तों के साथ खेलने का होगा। वह अपने अध्ययन में भी लगातार सफल रहता है और अब उसे खेलने का मोका भी मिलता है।

अब भी वह अपनी रूचि के अनुसार अपने दोस्तों के साथ खेलता है, पर अब उसे दूसरों से भी जुड़ जाने की आवश्यकता नहीं है। वह हमेशा खेलना चाहता था, लेकिन इसके लिए वह भी कुछ समय मुख्य रुप से खेलने के लिए निर्धारित करने के लिए उपलब्ध है।

वह अभी भी उसी समय को लेकर खेलने के लिए तैयार रहता है और इस तरह वह अपनी रूचि से जुड़े खेल समाज के साथ खेलता है। अब बच्चा खेलने में अधिक खुश और समझदार हुआ है।

इस बच्चे ने सीखा है कि जब तक आप अपनी रूचि के अनुसार काम करते हैं, तब तक आप खुश रहेंगे। वह अब अध्ययन करता है और जब उसे खेलने का मौका मिलता है, तब वह ध्यानपूर्वक खेलता है।

उसका अवश्य उसके जीवन में एक उपलब्धि की तरह है और वह उसे अपने सारे जीवन के लिए याद रखेगा। वह अधिक खुश और अधिक समझदार हुआ है।

खेलने से हमारा शारीर आराम प्राप्त करता है, अपने अपने अंगों को बल देता है, मन को शांति देता है और हमें सकारात्मक ढंग से सोचने की शक्ति देता है। किसी बच्चे के लिए, खेलना एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्तर है।

कागा जी

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