Title: बचपन की यादें
चारों तरफ बस्ती की नींदी नींद ले रही थी। एक छोटा सा बच्चा सड़क के किनारे जाकर खड़ा हो गया। बच्चे पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था। ना कोई गुड़िया थी जिससे बच्चा केलकुलाने लगे ना ही कोई खिलौना जैसे की बेलन था। सड़क पर सोती लोगों की तरह बच्चा भी अपनी नींद में सकुशल था।
बचपन की ये अनमोल यादें अब भी उस छोटे से बच्चे को सताने आती है। बच्चा ये सब बातें भूल गया होगा दरअसल वो अब एक बहुत बड़ा आदमी हो चुका होगा।
पर कैसे भूल सकता है बच्चपन जब वही बच्चपन उसे थैरीता है। जब वो माँ किस्से लेकर सुलाया करती थी तो जब वही माँ सुलाया कुर्सी पर बैठकर करती है तो बचपन का हर पल यादगार होता है। जब वो पापा सफर किया करते थे तो उनका आने का इंतजार करते वक्त बचपन की आंखों में भरे हुए आशु-द्रोट फिर समाए जाने लगते हैं।
बचपन के सुनहरे सपनों की यादें उस चेहरे पर मुस्कराहट की झलक ला जाते हैं। बातें करते-करते समय जब ये यादें बाहर आती हैं तो समय झोंकेदार होने लगता है। बचपन के साथ-साथ फूलों के भी संगीत और रंग, पुस्तकों का साथ और रातों का सबेरा भी याद आते हैं।
बचपन की यादें बहुत सुंदर होती हैं। इनमें शामिल होती पौराणिक कथाएं, मुहावरे, मजेदार खेल, स्कूल में दोस्तों के साथ मसती, बहुत मिठे-मिठे जूते झोले और बड़ी-बड़ी दुकानों से खरीदा हुआ सस्ता सामान सब होता है। इन सब बातों को रोजमर्रा का कर देने से समय कठिनताओं को भूलने में सहायता करता है।
ये वह समय था जब हम सब सूखा मांस में नहीं बल्कि खोआ मांस में अपना समय बीताते थे। जब हमें कंगाली अच्छी लगती थी जेब में कुछ भी नहीं होता था फिर भी जन्माष्टमी के दिन अपने गाँव की लाठियों से खेलते थे और खुश होते थे।
ये वह समय था जब खर्चे लेनदेन नहीं थे, बस जो था सब उसी से काम चलाना पड़ता था। आज की तरह अक्सर खराब खाना खाते थे और मौकों पर सारी दुर्घटनाएं सब आम होती थीं। फिर भी हमें खुश होने का कोई बहाना ही चाहिए होता था। जिस रोज कुछ नहीं खाया हो उस दिन बचपन में खेलते थे जो कुछ भी उट जाए दिमाग में।
बचपन में कभी नहीं सोचा जाता कि हम आज ज़िंदगी में कैसे स्थान बना सकते हैं। इसलिए जब भी हमें मौका मिलता है तो हम जमकर मसोखते हैं। बचपन के खोये हुए समोय को वापस लाकर खुशियों से भरा जीवन जीने में उन समयों का उल्लास नहीं भूला जा सकता।
इस तरह बचपन की यादें किसी भी समय कम नहीं होतीं। वो लम्हे चाहे अंधेरे हों या उजाले, लम्हे सब ज़िन्दगी का हिस्सा होते हैं। वो घटनाओं का एक झलक होते हैं जो हमारी ज़िन्दगी को बहुमूल्य बनाते हैं। बचपन के सुंदर दिनों की खुशबू, उन खुशियों की यादें हमेशा हमारे साथ होती हैं। अब भी जिस बचपन में हम गुमनाम होते थे वहाँ कुछ लम्हें बने थे जो हमसे पूछते थे, “तुम्हारी यादों में कुछ गुमनाम हम भी शामिल थे ना?”