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खोया हुआ स्नेह (Lost Love) विशाल शहर में जहां सुख-समृद्धि

Title: खोया हुआ स्नेह (Lost Love)

विशाल शहर में जहां सुख-समृद्धि की बात होती है, वहीं एक लड़की थी जो अपने लिए अपने साथियों के साथ बस खोयी रहती थी। बचपन में उसका सबसे अच्छा मित्र चंदन था, दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। वे हमेशा एक-दूसरे के साथ समय बिताते थे, स्कूल जाने देने से लेकर गलियों में फिरने तक।

छोटी छोटी बातों के बावजूद अपने खोये हुए स्नेह को धुंधना किसी भी राह में इतना आसान नहीं था। इसके पीछे वह उस भागमभाग शहर में खो गया जिसे अधिकतर लोगों ने अनदेखा कर रखा था।

एक दिन, सारी उद्यमिता के बावजूद, लड़की ने अपने घर के पास ये सोचा कि उसे अपने सभी साथियों को धुंधना होगा। वह एक लम्बे खोज के बाद अंततः चंदन के घर पर पहुंची।

चंदन के घर की खिड़की से वह पहली नजर में ही देख सकती थी कि उसका पुराना मित्र अपने आप को संभालने में असमर्थ था। वह उसके पास जाने के लिए तैयार नहीं थी, उसे वह सीधे सार्वजनिक विचार कर आगे बढ़ना पड़ता था।

चंदन स्वस्थ नहीं था, उसे कुछ बीमारी थी, जिसे डॉक्टरों ने नहीं देखा था या न ही किसी दवा से उसके गुण सुधारे जा सकते थे।

लड़की ने चंदन से समझा बताते हुए कहा कि “तुम्हें ठीक होने की जरूरत है।” चंदन कुछ नहीं बोल सका। वह आमतौर पर किसी भी चीज के बारे में कुछ भी नहीं सोचता था।

लोग समय के साथ बदलते हैं और यह लड़की भी उसकी जैसी नहीं रही थी। उसकी जीती-जागती दुनिया में उसे कुछ और ही प्रिय ढूँढना हुआ था।

परंतु स्नेह का खोया हुआ रिश्ता उसे दोबारा धुंधने पर मजबूर बताता था। उसने ये महसूस करा कि वह पास भी होते हुए अकेला-सा महसूस करती है।

उस घटना के बाद से स्नेह को बेहद ही दुख हुआ। उसे चंदन की बीमारी का भी संज्ञान नहीं था, लेकिन उसे मालूम था कि वह चंदन के लिए कुछ करना चाहती है।

लड़की ने दोस्तों को बुलाकर उसे बेहतर ढंग से देख-रखा करना शुरू कर दिया। उसने उत्तराखंड जाने के लिए डोली बुक करा दी, ताकि वह और उसकी टीम वहां पहुंचकर दो दिन का ट्रेकिंग कर सकें।

चंदन ने अभी तक उससे कुछ नहीं कहा था, लेकिन उसे आखिरकार बोलने का समय आ गया था। वह जानता था कि उसे अपनी ज़िंदगी सामान्य रूप से जीने से कोई फर्क नहीं पड़ता था।

चंदन ने बताया कि अपने स्थान पर रहते हुए उसे अधिकतर विश्राम मिलता है। उसे सिर्फ अपनी ही आत्मसम्मान को संभालने की आवश्यकता होती है, और वह इसलिए अकेले रहता है।

चंदन ने कहा कि वह उसे बोलना नहीं चाहता था क्योंकि वह उसे रूठ जाने की परवाह किए बिना कमजोर समझने का नाम होता है। चंदन की बातों से स्नेह थोड़ी सी शर्मा गई थी।

लेकिन चंदन की बात मिली स्नेह के अंतिम खोज को अवसान तक ले आया। चंदन ससमय ठीक हो गया था और उसने स्नेह को धन्यवाद दिया। उसने उसे अपने दोस्तों की टीम का हिस्सा होने के लिए आमंत्रित किया, जिसे स्नेह ने कुशलता से ग्रहण किया।

वे दो दिनों तक ट्रेकिंग करते रहे, जहां स्नेह को अधिकतर ऐसी यात्रा का प्रदर्शन करने का मौका नहीं मिलता था। लेकिन इस सफर से वह भावनाओं की पैकींग करती आ रही थी और इससे उसे चंदन से जुड़े स्नेह की जरूरत नहीं थी।

प्रकृति के साथ उनकी आनंददायक बातें और चुनौतियों से, सभी साथियों के बीच के बंधन को बढ़ावा मिलता है। स्नेह के उस अनुभव के बाद, वह दोबारा उसे खोने नहीं देना चाहती थी। उस दिन से, चंदन उसके सबसे मुख्य साथी थे, जिसे वह स्नेह के साथ संभालना आसान महसूस करती थी।

लेकिन, बेवास शहर ने उसे खोया हुआ स्नेह दोबारा कभी नहीं दिया। एक संजोए गए स्नेह का फिर से कभी पास नहीं आ सकता।

कागा जी

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