हिंदी कहानी: अकेली लड़की की दास्तान
एक अकेली लड़की, नाम था जुही। वह शहर से दूर अपने दादी के घर में रहती थी। जुही की माँ बहुत साल पहले ही दुनिया से चली गई थी और पिता विदेश में काम करते रहते थे। जुही के दादा-दादी उन्हें सब प्यार देते थे, लेकिन जुही की जिंदगी में कुछ निश्चित नहीं था। वह हमेशा सोचती रहती थी कि वह अकेली है और उसे कोई समझता नहीं है।
एक दिन, जब जुही अपने दोस्त के साथ खेल रही थी, उसने एक नीचे निकलती चीख सुनी। उसने जल्दी से दोस्त की तरफ दौड़ा और देखा कि दादी बहुत गम में हैं। उसने दादी से पूछा कि क्या हुआ है, लेकिन दादी उत्तर नहीं दे पाईं। जुही ने दादी से कहा कि वह मदद कर सकती है।
अगले दिन, जब जुही उठी तो देखा कि दादी झुकी हुई थी और वह रो रही थी। जुही ने उसे सामने कूदा और पूछा कि क्या हुआ है। दादी ने बताया कि रात भर उन्हें पैरों में दर्द हो रहा था और वह कुछ नहीं कर पाईं। जुही ने कहा कि वह अब उनकी मदद करेगी।
जुही ने दादी के पैरों की मसाज किया और उन्हें सहारा देते हुए बाहर ले जाया। वह उन्हें धूप में बैठाया और अपनी चादर से ढक दिया। दादी ने जुही को थका-मक्का कर दिखा दिया और धन्यवाद दिया। लेकिन जुही को लगा कि वह कुछ और कर सकती है।
वह जब स्कूल से लौटती, तब भी उन्हें एक संघर्ष का सामना करना पड़ा। जब वह घर आई, तब उसने देखा कि उसका दादी सो रही थी। वहन जाकर उन्हें झटके से उठाया और खाने बनाने में मदद करने लगी। दादी को बहुत अच्छा लगा कि उसकी पोती तकलीफ में नहीं छोड़ रही है।
एक दिन, जब जुही अपने दोस्त के साथ खेलती हुई घर लौटी, तब उसने अपनी दादी को गुमसुम होते देखा। जुही ने पूछा कि क्या हुआ है, लेकिन दादी ने कुछ नहीं कहा।
फिर अगले दिन, जब जुही उठी, तब उसने देखा कि दादी उसके साथ सोती हुई थी। वह बहुत चिंतित थी कि दादी काफी कमजोर दिख रही हैं और कुछ गलत हो रहा है। जुही ने अपने पिता को फोन किया और उन्हें सब बता दिया। पिता ने उसे रात में अस्पताल ले जाने के लिए कहा।
जुही ने दादी को उठाया और अस्पताल ले जाया। वह उनसे कुछ जाँच करवाने की मांग करती थी, लेकिन दादी नहीं थे परेशान कि उसे क्या हुआ है। जब उन्होंने जाँच करवाने लगे, तब पता चला कि उन्हें कैंसर का रोग हुआ है।
जुही को बहुत घबराहट हुई, लेकिन वह अपनी दादी की साथ थी। उसने अस्पताल में उसे हमेशा के लिए छोड़ दिया और उसकी देखभाल करने वाली नर्सों के साथ बँधी।
दादी ने जुही से कहा कि उसे अगले तीन महीने के लिए अस्पताल में रखा जाना होगा, ताकि उसका इलाज हो सके। जुही ने दादी को देखकर उससे कुछ मांगने का नहीं सोचा, बल्कि अपने दादी को थोड़ा सा खुश करने का सोचा।
उसने उसे एक सुंदर सा कुर्ता बनाया और उसे हाथों से खाना खिलाया। दादी बहुत खुश थी कि उसकी पोती उसके साथ है और उसे थोड़ा समय दे रही है।
इस रूप में, उन तीन महीनों में, जुही ने दादी की मदद की और उन्हें अच्छी तरह संभाला। उसने दादी को पैसे भी दिए ताकि वह अपनी ट्रीटमेंट के लिए पैसों की कोई कमी ना महसूस करें।
तीन महीने बाद, दादी स्वस्थ हो गई थी और वह घर वापस चली गईं। लेकिन इस अनुभव से जुही ने बहुत कुछ सीखा था। वह अकेले होने से कभी डरने वाली नहीं रही थी, बल्कि वह अब अपने आप को गर्व से भरपूर महसूस किया करती थी।