Title: एक परम ज्ञानी कहानी – Ek Param Gyaani Kahani (A Tale of Supreme Wisdom)
एक समय की बात है, एक गांव में एक बहुत ही ज्ञानी व्यक्ति रहता था। वह हमेशा सभी की सहायता के लिए तैयार रहता था। उसे अपनी घर में हमेशा अनेक ज्ञान, संस्कृति आदि कुछ उपयोगी जानकारी की पुस्तकें रखी होती थीं। वह अच्छे से जानता था कि कौन से ज्ञान बच्चों का मनोरंजन करते हुए दिया जाना चाहिए, और कौन सा ज्ञान उनके भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है।
यह गांव बहुत छोटा था, इसीलिए अधिकांश लोग उस महान व्यक्ति को ज्ञानी कहते थे। उनमें से अधिकांश लोग सोचते थे कि वह सर्वश्रेष्ठ समझदार है। उनकी राय का महत्त्व भी अत्यधिक था और वह अक्सर गांव के सारे मुद्दों के लिए समाधान ढूंढने के लिए बुलाया जाता था। चाहे वह कोई विद्यालय या कृषि समस्याएँ हों।
एक दिन गांव में कुछ लोगों ने गए थे, उनको उस ज्ञानी के खुशली से कुछ गाली दीया था, वो कुछ ज्ञानी की तारीफ नहीं सुनना चाहते थे। ऐसे लोगों द्वारा दी गई गाली का प्रभाव ज्ञानी के सर पर जाने के बराबर था। यही हुआ कि ज्ञानी कुछ दिनों के बाद अपने घर से नहीं निकले।
गांव के अन्य लोगों को यह नहीं मालूम था कि ज्ञानी क्यों अपने घर के अंदर ही बंद हैं। अधिकांश लोग उसे याद करते हुए,V उसके घर से गुजरते थे, मगर ज्ञानी अपनी बातें किसी से नहीं कहता बस अकेले ही रहता था।
एक दिन, एक बुजुर्ग लोग ने उसके घर पर आवाज लगाई, समय बर्बाद करते हुए, जब वो खुले द्वार देखते हैं, तो वे ज्ञानी के चेहरे की हालत के लिए दुखी हो गए। ज्ञानी का चेहरा ऐसा था जैसे उसे बहुत ज्यादा चिंता है। बुजुर्गों ने उसे पूछा कि आपकी कौन सी समस्या है? ज्ञानी ने कहा, ‘मैं इसे उन सभी लोगों से साझा नहीं कर सकता जिनको मैंने इतनी ज्यादा मदद की है।’ बुजुर्गों ने उससे बात करने के लिए जोर से यह कहा कि ‘उस परम ज्ञानी से बात करो, जिसे आप जानते हैं’
ज्ञानी ने जब वे बात करने के लिए कहा, तब वे कैसे आपकी मदद कर सकते हैं? ज्ञानी ने दोबारा जवाब दिया, ‘वह तो उस इंसान से जुड़ा हुआ है jo मैंने किसी को बताया नहीं है।’
ज्ञानी ने उस व्यक्ति का कोई नाम नहीं बताया था लेकिन बुजुर्गों को समझ में आ गया कि वो शायद गांव से बाहर का था। उन्होंने सोचा कि यह आदमी कौन हो सकता है जिससे इस ज्ञानी ने अपनी बातें नहीं बताई होंगी।
उस दिन से बुजुर्गों का मानना था कि हमेशा समय-समय पर कुछ कुछ ज्ञानी दूसरे लोगों से अलग रहना पसंद करता है। इसलिए उन्होंने यह प्रयास किया कि वह व्यक्ति कौन हो सकता है जो उस ज्ञानी को तुमने नहीं बताया।
कुछ दिनों बाद एक शेर गांव में आ गया। आदमी भयभीत हो गए थे और उन्हें शेर से निपटने के लिए किसी को नहीं मिला। जब ज्ञानी ने इस बात को जाना, उसने कहा कि शेर के साथ मैं संवाद कर सकता हूँ। लोग देखते रह गए हमेशा समझते हुए कि यह कैसे हो सकता है? वह सारे लोगों की नज़रों में समान होते हुए, अपने घर में से बेहोशिया का विशाल ट्रंक निकाल दिया। वह उस व्यक्ति से जुड़ा हुआ था, जिसे उसने पहले कभी नहीं बताया था।
ज्ञानी ने trunk से टाइम मशीन से जुड़ा हुआ मशीन निकाला, जिसे उसे उस व्यक्ति से मिला था। जब शेर के साथ संवाद शुरू हुआ तो ज्ञानी कथा कहता चला गया। कथा के अंत में, शेर इस समस्या को निपटाने के लिए हाथ मिलाने के लिए तैयार था।
इस तरह आदमी एक-एक कर सभी समस्याओं को रिसॉल्व करने के लिए सुझावों को देता रहा और वह शेर के साथ हाथ मिलाकर उस समस्या को निपटा लिया। लोगों ने इस समस्या का समाधान देखा और उन्होंनें ज्ञानी से बहुत ही अधिक मंदबुद्धि का फलास्तान लिया। उसे हर कोई सम्मान देने लग गया था और उसे एक समझदार कहा जाने लगा था।
इस कहानी को सुन कर हमें ये सीख मिलती है कि किसी इंसान के बारे में हम कभी भी उसके बिना सुनिश्चित नहीं कर सकते। अगर हम बिना सुने, बिना जाने कुछ कहते हैं तो फिर हमें घायल भी नहीं कीया जा सकता। स्मार्ट होने की जगह अपने मन में संतुलन बनाएं और दूसरों से समझदारी से बात करें। इसे शांती और समृद्धि का मार्ग कहा जा सकता है।