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दोस्ती की दास्तान: अब्दुल्रहीम और संजय बचपन से ही दोस्त

दोस्ती की दास्तान:

अब्दुल्रहीम और संजय बचपन से ही दोस्त थे। दोनों एक साथ खेलते, पढ़ते और जमीर की बात करते थे। अब्दुल्रहीम एक मुस्लिम था जबकि संजय एक हिंदू था। इनकी दोस्ती कोई धर्म नहीं देखती थी। दोनों आपस में बहुत खुश रहते थे, अब्दुल्रहीम को संजय से सब समझते थे और संजय को भी अब्दुल्रहीम से ज़्यादा अच्छे दोस्त कोई नहीं थे।

परदे के पीछे से, अबदुल्रहीम अपनी मशहूरी को संजय से छिपाने की कोशिश करता था। वो लोग अच्छे दोस्त थे, लेकिन अब्दुल्रहीम की दोस्ती खुलेआम नहीं थी। हालांकि, संजय को शक था कि कुछ ऐसा है जो अब्दुल्रहीम उनसे नहीं बाँट रहा है।

एक दिन, संजय मिलने अब्दुल्रहीम के घर गया। वहाँ पहुँचते ही उसे एक छोटे से लड़के ने उसे जोर से बुलाया। “क्या आप मेरे दोस्त हो संजय?” पूछा लड़का।

“नहीं, मैं तुम्हारा दोस्त नहीं हूँ।” जवाब देते हुए संजय थोड़ा सा अक्सरा हुआ।

“तो क्या आपका दोस्त एक मुस्लिम होता है?” प्यार से पूछा लड़का।

“हाँ, वो मुस्लिम है।” संजय बयान करते हुए थोड़ा अनमना लगता था।

“फिर आप मेरे दोस्त हो सकते हैं, क्योंकि मैं भी मुस्लिम हूँ!” लड़का खुश होकर बोला।

उस दिन से लड़के के नाम नसीर हो गया और संजय उनके दोस्त बन गए। संजय ने अब कभी अब्दुल्रहीम से नहीं छुपाया कि वो उसे अपने बाकी दोस्तों से अलग रखना चाहता था।

किसी दिन, संजय नसीर और अब्दुल्रहीम को एक साथ देखा। वो एक होटल में जा रहे थे और उसे लगा कि उन्होंने उनके पीछे जाकरुकना चाहा था। संजय ने अब्दुल्रहीम से कहा, “तुम मुझसे कुछ छुपाते क्यों हो? तुम्हारी दोस्ती तुम्हारे और मेरे बीच कहाँ जाती है?”

अब्दुल्रहीम शरमाते हुए धीमी आवाज में बोले, “मैं ये जानता था कि संजय तुम्हारे असली दोस्त होते हुए भी नहीं हो सकता है।”

संजय स्तब्ध हुए थे। फिर वह अब्दुल्रहीम के पास गया और उसे गले लगाया। “तुम मुझे पूरी दुनिया से अधिक है।” संजय बोले, “तुम्हारी और मेरी दोस्ती बेबाक और सच्ची होनी चाहिए।”

उस दिन के बाद, अब्दुल्रहीम को अपनी दोस्ती को सारे दुनिया में साझा करने की जरूरत महसूस हुई। वो सबसे मिलकर, मुस्लिम या हिन्दू, सभी से प्यार करता था।

उन्होंने अपनी सोच बदल दी और उन्होंने संजय से माफी मांगी। संजय उन्हें दोस्ती से गले लगाकर जवाब दिया।

दोनों ने मिलकर वादा किया कि वो अपनी दोस्ती को संजाएंगे और कभी ऐसा कुछ नहीं करेंगे जो उनकी दोस्ती को नुकसान पहुँचा सके।

यह दोस्ती कभी नहीं टुटी और आज भी अब्दुल्रहीम और संजय सबसे अच्छे दोस्त हैं।

कागा जी

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