एक अजनबी से प्यार | Love for a Stranger
श्रेया अपने मोबाइल पर कुछ मैसेज पढ़ रही थी, जब उसे एक अजनबी से टकराना पड़ा। उसने उस व्यक्ति से माफी मांग ली, जो बिना कुछ कहे चला गया। थोड़ी देर बाद, उसने आगे बढ़ते हुए पता लगाया कि वह आदमी भी उसे पहचानता नहीं था और उसे एक संदेह हुआ कि क्या उसने सही व्यक्ति से माफी मांग ली या नहीं।
वह नाराज और संदेहग्रस्त थी। रात के लबालब समय, वह अपने बालकनी में थी और आसमान की ओर देख रही थी। बारिश शुरू हुई थी, जो उसे काफी ताजगी दे रही थी। इस समय में, वह आगे की तरफ देखी और वहाँ से उसे एक आदमी दिखाई दिया। वह एक तंग मोर्चे पर खड़ा था और उसके चेहरे पर कुछ गम नजर आ रहा था।
श्रेया ने सोचा कि उस व्यक्ति पर थोड़ी देर तक ध्यान देना सही नहीं होगा, लेकिन जब वह उसे देखती रही तो वह उससे बात करने आया।
“क्या आप ठीक हैं?” उसने पूछा।
जब उसने यह पूछा तो उस व्यक्ति ने उसे पूछा कि “क्या आप मुझसे पहले मिले हुए हों?”
श्रेया को अचानक दौरे लगा और उसे याद आया कि यही वही आदमी है, जिससे वह टकराई थी। उसने मैसेज लिख कर माफी मांग ली थी।
उस व्यक्ति ने उससे प्यार से कहा, “कोई बात नहीं। हम सभी गलतियों से गुजरते हैं।”
उस समय से, उन दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता हो गया। वह दोनों मिलने लगे और एक दूसरे की बातों को सुनने लगे। श्रेया उस व्यक्ति के उदास एवं उथल-पुथल जीवन से परिचित हुई। उसे एक दिन उसके चेहरे की गमगनता से पता चला कि उसका पति भी उसकी तुलना में परेशानी से गुजर रहा था। पति बाहर जाने से पहले उसे एक कागज देकर चला गया था। उसमें लिखा था कि वह इसे श्रेया को दे दे।
श्रेया कागज पर देखने लगी और उसे पति के नाम और नंबर नजर आए। उसे लगा कि वह उसके जीवन में पुराने दर्द का साधन बन सकते हैं।
उसने उसके नंबर पर कॉल कर दिया और पासवर्ड पूछा। पति ने सही जवाब दिया और श्रेया ने उसे अपना नंबर दिया।
वे दोनों दिनों में कुछ बातें करने लगे, फिर एक दिन, पति ने श्रेया से कहा कि वह उससे मिलने आएगा।
संध्या होते हुए, उन दोनों ने एक रेस्टोरेंट में मुलाकात की। श्रेया को पतिने पूछा कि उसे एक उड़ान का अनुभव करना है। पति ने उसे सूचित किया कि वह उसे एक दिन के दौरान पिलोट बनाएगा। श्रेया को इस से बड़ा उपहार हो नहीं सकता था।
दोनों आगे बढ़ते हुए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन श्रेया को अब एक पुरानी खुशी वापस मिल गई थी। वह जानती थी कि उसे अब कभी उस आदमी के साथ किसी बात पर संदेह नहीं होगा। उसने उस आदमी से महसूस किया कि उसे भी यही खुशी मिली थी। अस्पताल में वह दोनों एक दूसरे को समझते हुए मिल चुके थे।
उस दिन से लेकर वह दोनों एक दूसरे की सोच जानने लगे थे। श्रेया ने जीवन में आने वाली तरंगों से लड़ना शुरू कर दिया था और उसके जीवन को एक नई साख मिल गई थी। उससे पहले, वह यह सब सोचती थी कि उसका जीवन कैसे हमेशा काले पानी में ही चला जाता है।
दोनों के बीच रिश्ता मजबूत था, लेकिन उन्हें दो भेद दुख हुए – उस व्यक्ति का जीवन समाप्त हो गया था और उसकी विधवा बहन हो चुकी थी। उस व्यक्ति का नाम था सुनील और उसकी विधवा बहन का नाम था नीलम।
दोनों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और श्रेया को सुनील और नीलम दोनों पर कर्ज उतारना पड़ा। श्रेया अपनी दोस्ती का परिणाम भुगत रही थी, लेकिन वह जानती थी कि उसे यह उठाया जाना था। उसे ऐसा लगता था कि इस से उसकी दोस्ती इतने ज्यादा महत्वपूर्ण थी कि वह इसे कुछ भी पूछते हुए दे देती।
इस पूरे समाचार का उपयोग इन दोनों के बीच एक अनूठे प्यार के लिए किया जा सकता था। श्रेया जानती थी कि वह सुनील से प्यार करती है लेकिन वह जानती थी कि वह कभी उससे नहीं कहती थी। शायद उसने सही बिना तलाश किया होगा, पर शायद उसने भी जान लिया कि कभी-कभी प्यार हमारी नजरों के बाहर होता है।