आखिरी मुलाकात | Last Meeting
शीतकालीन सुबह के स्वास्थ्य सम्बन्धी समय में एक व्यक्ति अपने घर से निकला था। उसका नाम सुमित था और वह अपनी मोटरसाइकिल पर चल रहा था। उसने वैभव के जैव केंद्र में अपनी नौकरी शुरू की थी। उसने जमानत के लिए काफी लड़ाई लड़ी थी लेकिन उसे तलाक से निवृत्त कर दिया गया था।
सुमित अपनी मोटरसाइकिल पर इंटरस्टेट-5 के साथ जुड़ी सीमा को पार कर रहा था। उसने यह सोचते हुए सोचा कि अगली बार जब वह चारिटेबल तय करता है, तो उसकी पत्नी और बच्चों के लिए अधिक समय निकालने के लिए कोशिश करेगा। उसने वहाँ भव्य इमारतें देखीं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षक थीं। इसलिए, सुमित के दिल में शांति नहीं थी। उसे किसी से प्यार भी नहीं हुआ था। वह सुभाषित के बारे में सोचता है जो कहता है, “शांत मन परमात्मा का लिए घर है।” सुमित ने क्या किया था, वह अपनी जिंदगी के लिए खुश नहीं था।
उसकी डिस्को एंड अडाएंट कम्पेनी कई संबंधों की वजह से अच्छी तरह से चल रही थी, जिसमें उसके पत्नी रोशनी ने उसे साथ दिया था। अफसोस कि उस वक्त उनके बच्चों की उम्र पेटायी हो चुकी थी। वह बच्चों से बातें करता है, लेकिन उनसे दूर रहता है। सुमित जानता था कि उसके साथ एक न होने से उसके दो पुत्र नुकसान में हो रहे हैं। उसने वचन खाया था कि उसे उनके लिए शिक्षा प्रदान करना होगा।
उसको याद है जब वह रोशनी के साथ गर्म दिनों में पानी के अधिक दिनों में नहाता था। वह उस समय पूरे दिन काम करता था और फिर रात के समय उसने उन्हें धोया। वह अपने आखिरी दिनों की शिकायत करता है, जब वह बीमार था और उसकी नींद विराम में दो घंटे तक होती थी। उसे उन दिनों का ख्याल आता है जब उनकी पत्नी उन्हें सुधारने के लिए मंदिर में जाती थी।
उस दिन सुबह सुमित में बहुत समय तक काम पर लग गया। बाद में, रोशनी ने उसको समय दिया था ताकि वह सही ढंग से बायोलॉजी के प्रश्नोत्तर कर सके। वह आधे घंटे तक काम कर रहा था जब वह अचानक अहसास करता है कि वह सचमुच असमर्थ हो गया है।
उसने रोशनी से कहा, “मैं अपना काम नहीं कर सकता। मुझे इससे उबसी हो रही है!”
उसकी नजर उसकी सुपरवाइज़र सुमित पर गई। उसके वह कभी असफल नहीं हुए थे। वह भारत के एक प्रख्यात वैज्ञानिक थे। रोशनी ने उसे समझाया कि यह स्थिति अकसर आती है। उसे बात समझ नहीं आ रही थी। सुमित ने रोशनी से अलविदा कहा और घर लौट गया।
उसने उन दिनों की मिठास और गर्मजोशी से बुरी तरह सांस ली। वह अपने बच्चों से मिलने और उनसे बात करने का सोचता था तो रोने लगा।
उसका बड़ा बेटा उसे देखता है और कहता है, “आप रोए क्यों हैं, पापा?”
“मुझे पता है कि आप सीखना चाहते हैं। मुझे अपराध से अपनी जिंदगी बिताने के लिए माफ़ी चाहिए।”
वह अपने बच्चों से मुश्किल समय से गुजरता हुआ समझाता है।
सुमित परिवार से अलग हो गया था, लेकिन उसे सब सही लगता है जब उसे माफी मांगने का मौका मिलता है। वह अपने बच्चों के साथ समय बिताने का वादा करता है लेकिन वहीं रुक जाता है क्योंकि उसे कैंसर हो गया होता है और वह ४५ दिनों में मर जाता है।
हालांकि, वह अपने बच्चों से मिलता है, इस बात का अहसास नहीं होता है कि यह आखिरी मुलाकात होती है। सुमित के बच्चों ने उसे धन्यवाद दिया क्योंकि वह उन्हें जिंदगी भर के लिए प्यार करता रहेगा। वह जानते हुए गम और दुःख के बीच में सुमित की यादों में उलझे रहते हैं।