Title: एक बर्फीली रात की कहानी
राम और श्याम दो दोस्त थे। वे एक साथ देहरादून के पास हिमालय की पहाड़ियों में घूमने गए थे। यह उनके लिए पहली बार था जब वे इन पहाड़ियों में हैं। लेकिन वे इन मौसम में नहीं आने चाहते थे।
उन्होंने अपनी यात्रा पहले से ही तैयार कर रखी थी। वे कम से कम एक सप्ताह के लिए तैनात थे। वे एक छोटे से शहर से गुजरकर इस पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे।
जब वे पहाड़ों के बीच में थे, वे धीमे से चल रहे थे। लेकिन अचानक बादल लहराते हुए नजर आए। देर से, वे यह जानते हुए कि तार टूट गया है, बर्फीली हवा और टूटे हुए तारों के कारण, वे एक दूसरे से अलग हो गए।
एक बर्फीली रात शुरू हो गई थी। राम और श्याम समझ गए थे कि सम्भवतः अब वे एक दूसरे से मिल नहीं पाएंगे। वे बारिश के कारण नहीं डरे थे, लेकिन बर्फ के कारण डर था।
एक दूसरे को याद करते हुए राम और श्याम अलग-अलग रह गए। राम बहुत ज्यादा चिंतित हो गया था। उसके दोस्त से दूर होने का मन नहीं कर रहा था। सफलता के संकेत कहाँ टलते हैं, कौन जानता है।
श्याम भी आगे बढ़ रहा था। उसे लगता था कि वो एक नई हमली ढूंढ़ लेगा। लेकिन इतने बहादुर न होने के कारण, उसे बहोत घबराहट महसूस होती थी।
दिन भर राम अकेला एक घास के मैदान में था। उसे उसके दोस्त का महसूस नहीं हो रहा था। शाम को वह अब भी उपवास के साथ वहीं खाड़ा था। राष्ट्रीय पार्क का स्थान उसके बगल में था, जहां उसे विभिन्न जानवरों के राज्य का नमूना मिला।
अगले दिन सुबह, फिर से बर्फ शुरू हो गया था। ऐसा महसूस होता था कि दिन नहीं होगा। उसके दोस्त से दूर होने के चिंता ने राम को तैयार नहीं किया था।
अंत में, राम ने बहुत अकेलापन महसूस किया। अब उसे एक शराबी लग रहा था, जो पराई किसी चीज से प्यार नहीं करते थे। उससे एहसान महसूस हुआ जो अब उसके पास नहीं था।
अठहते हुए 3 घंटे बाद, राम को सोते समय एक सुई मार गई। श्याम भी था, लेकिन उसे नहीं पता था कि राम यहां है। अचानक, उसे लगा कि उसके दोस्त को चुकाने की जरूरत होती है।
राम के एक खूबसूरत चेहरे ने उसे राह दिखाई। बर्फ के चारों ओर भ्रमण करते हुए, वह उसे पाया। उसने ब्रेकफास्ट लिया था और वहां ही अपना रात्रि ढांढ स्थापित कर चुका था।
श्याम डर रहा था कि अब तक राम कहाँ रहा होगा। फिर से जांच करते हुए, उसे समझ में आया कि उसे भी महसूस करने की जरूरत होगी। वह उसके पास जा बैठा।
दोनों दोस्तों ने एक घंटे तक बातें कीं और उम्मीद की कि वे कुछ नया पाएंगे। लेकिन यह शाम हो गई थी जब वे एक दूसरे से से मिले।
एक अनोखा सौंदर्य उन ढलते शुटगंघियों में था। यह एक ऐसा दृश्य था जो वे नहीं भूल पा रहे थे। दुनिया की यह सबसे खूबसूरत रात थी।
वहाँ, वे दोनों तैरने लगे। राम बहुत समझदार था और उसे उसके दोस्त से एक साथ रहने का मजा आया। उसे अपने समय के साथ खुश रहना था।
श्याम भी ठहरना चाहता था क्योंकि उसे लगा था कि वो अब अपने दोस्त के साथ वीकएंड मजा कर रहा होगा।
बाद में, दोनों सफलता से ठीक हो गए। यह उन्होंने जाना था कि कैसे एक बदलते मौसम में भी वे अपने साथ संघर्ष कर सकते हैं। इससे पहले, वे एक अलग दर्जे के दोस्त थे, लेकिन आज वे अब बजाए सजाए एक-दूसरे के साथ हैं।
आज वे यह जान गए थे कि शाम की बर्फीली रात के बाद एक कमल की तरह नये संघर्ष और अभय से उपलब्ध हो पाएंगे।