Story Title: “दानी जन की कहानी”
एक समय की बात है, एक स्थान पर अमीर एक व्यक्ति रहता था। उसे अपनी सम्पत्ति से कोई फर्क नहीं पड़ता था और उसकी जिंदगी बस मतेरियलिज्म से भरी हुई थी। वह सिर्फ खुशियों के लिए कुछ खरीद लेता था, फिर भी उसे अधूरी खुशी मिलती रही।
उस ग्रामीण समुदाय में एक ग़रीब औरत रहती थी जिसका नाम राधा था। राधा के यहीं घर से एक छोटा सा मंदिर था जिसे उसने धर्म और पूजन का अभिमान रखा था। वह रोज भगवान की पूजा करती थी और उसकी खुशियों से आपने आप को संतुष्ट कर लेती थी।
एक दिन अमीर व्यक्ति के मन में ये विचार आया कि उसने भी कभी दान नहीं किया है। तो चाहे जो भी हो, आज वह दान करेगा। वह उस दिन मंदिर के पास से गुजर रहा था जब उसे राधा का घर नजर आया।
वह दृष्टि राधा के घर के पास जाने में आ कर थम गई। वह सोच में पड़ गया कि क्यों न वह राधा को अपनी सम्पत्ति से दान करे। तो वह राधा के घर में पहुंचा और उसे अधिक से अधिक मौजूदा समय की समय की सम्पत्ति दे दी। वह मानो सारी निद्रा ही निकल गई थी।
राधा बहुत खुश हुई कि उसने अपने घर का एक अमीर व्यक्ति को खुश करके, उसे धर्म और चरित्र सहित पूजा की तरफ आकर्षित कर लिया। राधा को लगा कि अमीर व्यक्ति ने उस दिन एक ऐसा दान किया जो उसको जीवन भर याद रखने के लिए बनता था।
थोड़ी देर बाद, वह अमीर व्यक्ति वहीं से गुजर रहा था जब उसे कुछ दूर से कोई हँसती हुई आवाज सुनाई दी। वह चलते चलते उसे सुनाई देने वाली आवाज की ओर बढ़ा।
वह एक जंगल की ओर जाने लगा और वहाँ पहुंचते ही उसने एक निगलने वाले शेर को देखा। वह शेर सीधे उसकी ओर बढ़ने लगा। वह अमीर व्यक्ति बहुत डर गया और यह सोचता हुआ रह गया कि उसके साथ कुछ खराब हो गया है।
तभी अचानक दिमाग में एक विचार आया कि- अगर यह शेर मुझे कुछ कर भी लेता है, तो मेरी सम्पत्ति मेरे साथ तो नहीं जा सकती है। पर फिर भी उसे भय था।
तभी उसने देखा कि शेर उसके पास से नज़र फेरते हुए सोए हुए हैं। वह तड़प उठा कि क्यों यह शेर मेरे पास सो रहा है।
हालांकि उसका प्रश्न जल्द ही जवाब पाया। शेर ने अपनी छाती खोलकर उसे उसके बगल में सुला लिया। वह शेर को महसूस करता रहा और मुंह खुल कर डर से स्क्रीम की तरह चिल्लाता रहा, लेकिन शेर उसे कुछ भी नहीं किया।
उसे डर की इतनी अधिक वजह थी कि उसका सारा शीशा कंधों पर पसार दिया गया। इस घटना के कुछ देर बाद, शेर उठा और उसके बगल में से हमेशा के लिए गया। उसकी साँस भी नहीं बदली।
वह सोचता रह गया कि यह शेर बहुत ही अच्छा हुआ। इसके कारण कुछ नहीं हुआ और उसने इसके साथ साथ अधिक समझ भी बढ़ाया।
उसे एक समझौता समझ में आ गया कि वह संपत्ति से नहीं खुश होता। कुछ करने से खुशी मिलती है। उसे समझ में आया कि उसने अपना जीवन सिर्फ मालामाल पाने में नहीं गँवाना चाहिए। अपनी सम्पत्ति से पूरे ग्रामीण समुदाय को मदद करने में अपना समय व्यतीत करना चाहिए।
एक दिन उसने इस समझौते का संज्ञान किया और उससे शुरुआत की। वह जितना हो सके, दान देने लगा और वहीं से उसकी जिंदगी मौलिक रूप से बदलने लगी।
वह अपने सारे बचत का एक बड़ा हिस्सा जनसमुदाय में खाने के लिए स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं प्रदान करने में लगाता था। लोगों के जीवन में खुशी फैलाना उसे बहुत महत्त्वपूर्ण लगने लगा था। इससे उसके कर्म का आनंद उसके जीवन से आते रहे।
समय बीत गया, एक समय आया जब दान करने वाला वह अमीर व्यक्ति मर गया। लोगों ने मरने के बाद उसकी याद में अतिथि भोज का आयोजन किया। उस दिन शाम के समय, राधा उसके यहीं पास से गुजर रही थी जब उसे वहीं उसका सम्मान किया गया।
क्योंकि यह उसका सामाजिक ऊर्जावान और सबृदर्श जन होने की ओर इशारा देता है, राधा ने उसके याद में एक कविता पढ़ दी। वह उन सभी को समर्पित हुआ जो कभी उसको समझाने का प्रयास करते थे कि एक अमीर व्यक्ति की जिंदगी क्या होती है।
राधा ने कहा था:
“दूसरों के दर्द से आप दूर रहते हो, लेकिन जब आप सहायता करते हो, वही तो सहायता के दिन होते हैं।”
उसकी ये कविता सभी के मनो व्यवस्था की, और समाज में अच्छाई बढ़ना शुरु हुआ।
एक दानी व्यक्ति की यह कहानी एक दूसरे एमोशन्स को स्पंदित करती है। कई लोग संपत्ति और स्थान के लिए भोगदृष्टि करते हैं, जबकि दूसरों को मदद करने में अनुकूलवादी आहार का अनुसरण करना आवश्यक होता है।