WhatsApp यूनिवर्सिटी का नया नियम: 10 बार फॉरवर्ड करो और झूठ को सच बनाओ!

नमस्कार, ‘काक-वाणी’ के ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ विभाग में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे उस महान विज्ञान की, जिसके सामने दुनिया के सारे वैज्ञानिक, रिसर्चर और खोजी पत्रकार घुटने टेक चुके हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोशल मीडिया पर चलने वाले नए ‘फैक्ट चेक’ सिस्टम की। इस नए सिस्टम के अनुसार, सत्य वह नहीं है जिसे सबूतों से साबित किया जाए, बल्कि सत्य वह है जिसे सबसे ज्यादा बार ‘फॉरवर्ड’ किया जाए।

यूनेस्को और नासा द्वारा प्रमाणित सत्य

WhatsApp यूनिवर्सिटी के नए शोधकर्ताओं ने एक क्रांतिकारी फॉर्मूला निकाला है। अगर किसी संदेश की शुरुआत में “यूनेस्को ने इसे सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है” या “नासा के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है” लिखा हो, तो उसे बिना किसी संकोच के परम सत्य मान लिया जाना चाहिए। इस तकनीक के तहत, यदि आप दावा करते हैं कि रात को सोने से पहले तकिए के नीचे प्याज रखने से मोबाइल की बैटरी चार्ज हो जाती है, तो इसके लिए किसी लैब टेस्ट की जरूरत नहीं है। बस संदेश के नीचे ‘NASA’ का नाम लिख दीजिए, आपका फैक्ट चेक पूरा हो गया!

‘फॉरवर्ड’ की संख्या ही है विश्वसनीयता का पैमाना

इस नई फैक्ट-चेक गाइडलाइन में स्पष्ट लिखा है कि यदि कोई खबर आपके फूफा जी, मौसा जी और सोसाइटी के ‘हेल्पिंग हैंड्स’ ग्रुप में एक साथ घूम रही है, तो उसकी सत्यता पर शक करना सीधे-सीधे पारिवारिक अपमान की श्रेणी में आता है। सबसे मजेदार बात यह है कि जो संदेश “इसे इतना फैलाओ कि सरकार जाग जाए” या “11 लोगों को भेजने से शाम तक शुभ समाचार मिलेगा” के साथ समाप्त होते हैं, उनकी सत्यता तो खुद-ब-खुद ईश्वरीय रूप से प्रमाणित हो जाती है। अब भला बताइए, दुनिया का कौन सा फैक्ट-चेकर आपको शाम तक नौकरी या लॉटरी लगने की गारंटी दे सकता है?

गूगल और विकिपीडिया हुए सेवानिवृत्त

इंटरनेट के इस स्वर्ण युग में गूगल और विकिपीडिया जैसे पारंपरिक फैक्ट-चेकर्स अब पूरी तरह से आउटडेटेड हो चुके हैं। अब असली फैक्ट-चेक सुबह की चाय के कप के साथ शुरू होता है, जहाँ रंग-बिरंगे गुलाब के फूलों वाली ‘सुप्रभात’ की तस्वीरों के पीछे छिपे हुए ज्ञान को ही अंतिम सच माना जाता है। इसलिए, अपने दिमाग का इस्तेमाल करना तुरंत बंद कीजिए, अपनी उंगलियों को थोड़ा कष्ट दीजिए और ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाकर इस नए फैक्ट-चेक अभियान के सक्रिय सैनिक बनिए। याद रखिए, सच वही है जो आपके इनबॉक्स में आया है, बाकी सब तो माया है!

कागा जी