नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के तीखे और कड़वे बुलेटिन में आपका स्वागत है। आज हमारी कौए जैसी पैनी नज़र विदेश के उस महान और उदारवादी समाचार पत्र ‘द गार्जियन’ पर पड़ी, जिसकी छाती भारत के लोकतंत्र को लेकर रात-दिन सुलगती रहती है। गार्जियन ने बड़ी ही संवेदनशीलता और रुदाली वाले लहजे में एक खबर छापी है – “प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बीच भारत की कॉकरोच जनता पार्टी का नेता गिरफ्तार!”
वाह! क्या क्रांतिकारी नाम है, और क्या दर्दनाक स्थिति है! अब तक तो हम साधारण भारतीय यही समझते थे कि राजनीति में केवल नेताओं की चमड़ी गेंडे की होती है, लेकिन इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने तो प्राणीशास्त्र और राजनीति विज्ञान के सारे पैमाने ही बदल दिए। जिस जीव के बारे में विज्ञान कहता है कि वह परमाणु हमले और प्रलय में भी ज़िंदा बच जाएगा, उस कॉकरोच पार्टी का नेता पुलिस के एक मामूली ‘हिट-स्प्रे’ और चार डंडों की खटखट से ही गिरफ्तार हो गया?
परमाणु बम से बचने वाले, पुलिस की जीप से घबराए!
हमारे राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम बिल्कुल सोच-समझकर रखा गया था। इस पार्टी का मूल सिद्धांत ही यही है—अंधेरे में चुपचाप फलना-फूलना, गंदे गटरों में बैठकर रणनीति बनाना, रात के सन्नाटे में जनता के राशन पर कब्ज़ा करना और जैसे ही कोई जवाबदेही की ‘लाइट’ जलाए, अचानक गायब हो जाना! क्या यह किसी भी मंझे हुए दिग्गज राजनेता के जीवन चरित्र से अलग है? बिल्कुल नहीं!
लेकिन अफ़सोस, द गार्जियन वाले लंदन में बैठकर भारत के इस ‘कीड़े’ की गहराई को नहीं समझ पाए। उन्हें लगा कि भारत में लोकतंत्र बिल्कुल खत्म होने की कगार पर है, क्योंकि एक ऐसे दल के नेता को जेल में डाल दिया गया, जिसकी कुल जमा पूंजी सिर्फ दो बैनर, चार कार्यकर्ता और रसोई की गंदी नालियां हैं।
द गार्जियन का ‘अंतर्राष्ट्रीय रोना’ और लोकतंत्र का रक्षक
पश्चिमी मीडिया का यह भारत-प्रेम भी बड़ा अजीब है। भारत में कोई भी, चाहे वह सड़क का कॉकरोच ही क्यों न हो, अगर सरकार के खिलाफ तख्ती लेकर खड़ा हो जाए, तो गार्जियन उसे रातों-रात ‘लोकतंत्र का अंतिम योद्धा’ घोषित कर देता है। कल को अगर हमारे देश के आवारा कुत्ते भी ‘रात में भौंकने के मौलिक अधिकार’ के लिए सड़क पर उतर आएं, तो विदेश में हेडलाइन बनेगी – “भारत में बेजुबानों की अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला!”
हमारा तो कॉकरोच जनता पार्टी के गिरफ्तार नेता जी को बस यही सुझाव है: नेता जी, आप तो कॉकरोच हैं! घबराते क्यों हैं? जेल की नाली से रेंगकर बाहर निकलिए, दोबारा पार्टी का झंडा उठाइए और फिर से ‘काक-वाणी’ को आप पर तंज कसने का मौका दीजिए। आखिर भारतीय राजनीति के इस गंदे नाले को बनाए रखने के लिए आप जैसे कीड़े-मकोड़ों का ज़िंदा रहना भी तो बहुत जरूरी है!
संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें