Title: अधिकार और दायित्व
आज की दुनिया अनैतिकता और असहीष्णुता से लबरेज है। इस दौर में जब सबकुछ खुलेआम हो रहा है तब सबसे अहम बात है अपना अधिकार और अपना दायित्व जानना।
अपना अधिकार जानने से हमें हमारे सही अस्तित्व का पता चलता है। अधिकार तो हर इंसान का अधिकार होता है। उनका अधिकार मानवता पर होना कभी नहीं समझा जा सकता। हमें अपने अधिकारों को समझना चाहिए और उन्हें हमेशा रखना चाहिए।
लेकिन जब बात होती है दायित्व की तो यह बहुत कम लोगों को माँलूम होता है। दायित्व होता है कुछ कर रहा हो और उसके जवाब में उसको ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है। सोचा जाए तो अधिकार और दायित्व दोनों हमारे अहम हैं, लेकिन दायित्व में एक महत्वपूर्ण संवेदनशीलता होती है जिसे हम समझना नहीं चाहते हैं।
दायित्व इंसान के कर्तव्यों का संगम होता है। इसमें वो संबंध होता है, जो हर तरह से हमारे व्यक्तित्व के संस्कार और मूल्यों को आकार देता है। इंसान इस दुनिया में गिरफ्तार हो जाता है कि उसकी ज़िन्दगी का उद्देश्य क्या है। लेकिन सच यह है कि हर इंसान का जीवन सिर्फ उसके कर्तव्यों का पूरा करना होता है।
अधिकार और दायित्व दोनों संबंधित होते हैं। हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि हमारे अधिकारों के आधार पर हमें दायित्व बनाना भी पड़ता है। हमें अपने परिवार, समाज और देश के प्रति दायित्व होता है। जब हम अपने कर्तव्यों का महत्व समझते हैं तब हमारी पहचान आत्मसम्मान में बढ़त है।
एक गुरु के वचनों में वे कहते हैं कि, “जब तुम दायित्व लेते हो तो उसमें ऊर्जा आती है और ये ऊर्जा तुम्हें नयी ऊर्जा देती है”। इसका मतलब है कि जब हम अपने दायित्व को पूरा करते हैं तो हमारी ऊर्जा अथक होती है और हमें सफलता मिलती है।
आखिर इस दौर में हम जो कुछ करते हैं उसका सीधा संबंध हमारे सामाजिक दायित्व से होता है। जब हम दूसरों के साथ अच्छी तरह से रहते हैं तो हमारा दायित्व पूरा होता है और हम सफल होते हैं। यदि हम समाज के साथ विरोध या विपक्ष के तौर पर काम करते हैं तो हमारे दायित्व का उल्लंघन होता है जो हमारी नाकामयाबी का कारण बन सकता है।
इसलिए, हमें हमेशा दायित्व का महत्व समझना चाहिए। हमें हमेशा सोचना चाहिए कि हम अपने अधिकार के साथ क्या कर सकते हैं। यदि हम अपने शक्तियों को सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं तो हम अपने कर्तव्यों का पूरा कर सकते हैं। दायित्व का पूरा करना एक सशक्त संघर्ष होता है जो हमें सुख-दुख के बीच से गुज़रने में मदद करता है।
इसलिए, हम दायित्व की ओर अपनी दृष्टि लगाएं और अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल करें। इस दुनिया में सफलता के लिए यही दो मुख्य चीजें होती हैं।