अरे सुनो-सुनो! अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की दुनिया से एक बहुत ही चटपटा और ड्रामा से भरपूर मास्टरपीस आया है। कतर के अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में चिल्ला-चिल्लाकर दुनिया को बताया है कि नई दिल्ली पूरी तरह ‘लॉकडाउन’ में है और भारत सरकार ने कुछ ‘कॉकरोच नेताओं’ को उठाकर जेल में डाल दिया है। वाह! क्या रूपक है, क्या निष्पक्ष पत्रकारिता है! ‘काक-वाणी’ की तरफ से इस क्रांतिकारी रिपोर्टिंग को कड़क चाय और 21 तोपों की सलामी!
कॉकरोच नेता: जो परमाणु हमले के बाद भी चुनाव लड़ लें!
अब जरा ईमानदारी से सोचें, तो अल जज़ीरा ने जाने-अनजाने में हमारे नेताओं का सबसे सटीक नामकरण कर ही दिया है। आखिर हमारे देश के राजनेता किसी कॉकरोच से कम हैं क्या? आप इन पर भ्रष्टाचार के हजार आरोप लगा दो, जेल भेज दो, चुनाव में ज़मानत ज़ब्त करवा दो या जनता से पूरी तरह जूते पड़वा दो—ये अगली सुबह फिर से नया कड़क कुर्ता पहनकर, टीवी डिबेट में ज्ञान बांटते हुए प्रकट हो जाते हैं। दुनिया में परमाणु हमला हो जाए तो शायद मानव जाति समाप्त हो जाए, लेकिन ये ‘कॉकरोच नेता’ और उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस हमेशा बची रहेगी। इन्हें पुलिस वैन में ठूंसना वैसा ही है जैसे कॉकरोच पर हिट स्प्रे छिड़कना—ये बस दो मिनट के लिए बेहोश होने की नौटंकी करेंगे और फिर पुलिस थाने के चाय-समोसे का बिल फाड़कर बाहर आ जाएंगे!
लुटियंस का जाम या अल जज़ीरा की ‘ग्लोबल इमरजेंसी’?
अब आते हैं दिल्ली के उस तथाकथित ‘लॉकडाउन’ पर, जिसे देखकर विदेशी मीडिया का कलेजा कांप गया है। विदेशी पत्रकारों को बेचारों को दिल्ली की रोजमर्रा की नौटंकी समझ ही नहीं आती। जंतर-मंतर पर चार नेता झंडा फहरा दें और पुलिस सुरक्षा के नाम पर दो प्लास्टिक के बैरिकेड लगा दे, तो अल जज़ीरा वालों को लगता है कि बस… आज तो भारत में तख्तापलट होकर ही रहेगा! अरे भाई, जिस दिल्ली में लोग गोलगप्पे की दुकान पर जगह बनाने के लिए आधा रास्ता ब्लॉक कर देते हैं, वहां दो बैरिकेड देखकर ‘आपातकाल’ की चीखें मारना सिर्फ विदेशी मीडिया की ही कलाकारी हो सकती है।
काक-वाणी का अंतिम ज्ञान
सच्चाई तो यह है कि दिल्ली में न कोई नया लॉकडाउन लगा है और न ही ये अमर ‘कॉकरोच’ नेता कहीं गायब होने वाले हैं। हिरासत में लिए गए नेता इस वक्त पुलिस थाने में सरकारी एसी की ठंडी हवा खा रहे होंगे और अल जज़ीरा की यह हेडलाइन अपने व्हाट्सएप ग्रुपों में शेयर करके खुद को चे ग्वेरा साबित कर रहे होंगे। अल जज़ीरा को हमारी सलाह है—इतना मसाला मत मिलाया करो, वरना अगली बार हमारे घर के असली कॉकरोच भी अपनी तौहीन के खिलाफ कोर्ट चले जाएंगे!
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