आखिर क्या है बॉलीवुड? ब्लैक एंड व्हाइट से 1000 करोड़ी क्लब तक का चटपटा सफर!

नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ की चटपटी दुनिया में आपका स्वागत है। हाल ही में विश्व प्रसिद्ध ‘ब्रिटानिका’ (Britannica) ने एक बड़ा सवाल उठाया- ‘व्हाट इज बॉलीवुड?’ यानी बॉलीवुड आखिरकार है क्या? अब विदेशी विद्वान अपनी किताबों में जो भी परिभाषा लिखें, लेकिन हम और आप तो जानते हैं कि बॉलीवुड सिर्फ एक फिल्म इंडस्ट्री नहीं, बल्कि हर भारतीय के खून में दौड़ने वाला मसालेदार इमोशन है!

‘बॉम्बे’ और ‘हॉलीवुड’ का अनोखा मसाला कॉकटेल

क्या आपको पता है कि ‘बॉलीवुड’ शब्द आया कहां से? 1970 के दशक में किसी दिमागदार शख्स ने मुंबई (तब बॉम्बे) और अमेरिकी ‘हॉलीवुड’ के नामों को मिलाकर यह चटपटा शब्द गढ़ दिया था। लेकिन हमारी सिनेमा की कहानी इससे बहुत पुरानी है। शुरुआत हुई थी साल 1913 में दादासाहेब फाल्के की मूक (Silent) फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ से। उस समय पर्दे पर कोई आवाज नहीं थी, लेकिन दर्शकों के दिलों में सिनेमा का जो जादू चढ़ा, वो आज 110 साल बाद भी नहीं उतरा है। फिर 1931 में आई ‘आलम आरा’ और हमारे सिनेमा ने पहली बार बोलना और गाना सीखा!

एंग्री यंग मैन से ‘किंग खान’ का जादुई दौर

1950 और 60 का दशक भारतीय सिनेमा का ‘गोल्डन एरा’ कहलाता है, जब राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी ने दुनिया को अपना दीवाना बनाया। इसके बाद 70 के दशक में बेलबॉटम पैंट पहने अमिताभ बच्चन ने ‘एंग्री यंग मैन’ बनकर पर्दे पर एंट्री मारी और ढिशुम-ढिशुम करके बॉक्स ऑफिस हिला दिया। फिर आए 90 के दशक के रोमांस के बादशाह- शाहरुख खान, सलमान खान और आमिर खान! आज का दौर सिर्फ ‘बॉलीवुड’ तक सीमित नहीं है, अब तो साउथ और नॉर्थ मिलकर ‘पैन-इंडिया’ बन चुके हैं, जहाँ ‘जवान’ और ‘पुष्पा’ का सिक्का चलता है।

सिर्फ नाच-गाना नहीं, जज्बात है हमारा बॉलीवुड!

अक्सर पश्चिमी लोग बॉलीवुड का मज़ाक उड़ाते हैं कि यहाँ हीरो-हीरोइन अचानक सरसों के खेतों में जाकर नाचने क्यों लगते हैं? अरे साहब! यही तो असली मज़ा है। हमारे यहाँ ब्रेकअप हो तो अरिजीत सिंह का सैड सॉन्ग है, खुशी हो तो ‘काला चश्मा’ है और शादी हो तो ढोल-नगाड़े हैं। ब्रिटानिका चाहे कुछ भी कहे, काक-वाणी का तो सीधा हिसाब है- जहाँ 3 घंटे का ड्रामा, 6 सुपरहिट गाने, ढेर सारा एक्शन और एक शानदार ‘हैप्पी एंडिंग’ हो, वही है हमारा असली बॉलीवुड!


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कागा जी