Title: ईमानदारी की कीमत
जब हम उससे मिले, उसका चेहरा खुशी से उजला था। उसने हमें अपने संबंधित कमरे में बिठाया और फिर अपनी पूरी कहानी सुनाई । वह एक छोटे से नगर में रहता था। उसका नाम विकास था। उसके परिवार में एक शराबी पिता और दो छोटी-छोटी बहनें थीं। उसके पिता कभी घर का खर्च देने में मदद नहीं करते थे और उनका लाखों रुपये का कर्ज भी था। विकास ने अपने दोस्तों की मदद से अपने परिवार को चलाया था।
अपनी दुकान में उसने अपने परिवार का पेट भरने के लिए बेचना शुरू कर दिया था। उसे अपनी दुकान की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वह दुकान में महंगी चीजें बेचने का विचार नहीं लगा सकता था, क्योंकि उसके ग्राहक ऐसे लोग थे जो अपनी पैसों में तंग थे।
एक दिन, उसने एक चीज खरीदी जो महंगी थी लेकिन उसे विश्वास नहीं था कि वह उन्हें बेच सकता है। उसने अपनी दुकान में उस चीज को रख दिया वह ख़ुश होकर घर छोड़ा।
कुछ ही देर बाद किसी ने वहां से उस चीज को ख़रीद लिया। वह ख़ुश होकर घर लौटा, लेकिन कुछ देर बाद वह एक बहुत बड़ी गलती कर बैठा। वह महसूस कर रहा था कि उसने उस चीज का रेट काफी ज्यादा लगाया था।
वह अपनी दुकान में वापस चला गया और जब वह वहां पहुँचा तो देखा कि उस चीज का कीमत वह नहीं था जो उसने सोचा था। उसने देखा कि उसने उस चीज को अपनी दुकान में किसी और के नाम से रख दिया था। उसे महसूस हुआ कि उसने कुछ गलती से कर दी थी।
वह अपनी दुकान से बाहर निकल कर उस दुकान पर जा पहुँचा जहां से उसने उस चीज को खरीदा था। वह उस दुकान के मालिक से मिला। उसने उसे सभी बातें बताईं जो हुईं थीं। उस मालिक ने बताया कि वह अपनी दुकान से वह चीज बेचने में असमर्थ था इसलिए उसने उस दुकान में समझौते करें और उसे बेच दिया था।
विकास ने उस मालिक को फोन और पैसे दिए और उससे माफी मांगने का वादा किया और फिर उसने अपनी दुकान से वह चीज नहीं बेची जो महंगी थी। उसने सोचा कि अगली बार वह चीज बेचने से पहले अपना आपको अच्छी तरह से तैयार कर लेगा।
विकास को उस घटना से कुछ सीख मिली। उसने सीखा कि ईमानदारी हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण होती है। ईमानदारी से किसी को छलनीति नहीं उतारा जा सकता है। और यह उसे भी सीखा कि किसी और की सहायता के बिना हम अकेले सफलता प्राप्त नहीं कर सकते हैं।