Title: एक अनोखी दरवाज़ा
जबड़ा पलटने की गंजाई काफी थी, श्रीवास्तव परिवार ने नये घर की तलाश में बहुत देर तक दौड़तें रहीं। एक बार रात को नए नए इलाके में लोगों के घर तलाशते हुए उन्हें एक बड़े ही अनोखे दरवाजे पर ध्यान पड़ा। इतनी चौड़ी तथा काली रंग की दरवाज़ा ऐसा लग रहा था जैसे कि यह स्वर्ग का द्वार हो।
श्रीवास्तव परिवार ने उस दरवाजे का बंदा धाक से खोला और घर के अंदर जाने की तैयारी में थे। पर जैसे ही वे घर के अंदर घुसे, छोटी सी लेडी उनसे मिली। लेडी ने उनसे आमंत्रण दिया कि वे घर देर रात तक रुक जाएँ।
श्रीवास्तव परिवार अपनी थकान मिटाने के लिए उस घर में रुक गये। लेकिन जैसे ही उन्होंने घर के अंदर जाकर लेडी के साथ बातचीत की, उन्हें यह एहसास हो गया कि ये घर कोई आम घर नहीं है।
मैडम के साथ बातचीत करते हुए श्रीवास्तव परिवार ने उनसे पूछा कि ये घर कौन सा है और वहां कोई विशेष वस्तु का आभास क्यों हो रहा है। आखिर मैडम ने उन्हें सच्चाई बता दी।
“यह घर ऐसे आदमियों का है, जो लोगों की मदद करते हैं। यहां कुछ भी कम नहीं होता। यह सब काम मुझे करना पड़ता है।”
श्रीवास्तव परिवार चकित हो गया और उन्होंने मैडम से पूछा कि उन्हें भी इस घर में सुलाने का आशीर्वाद मिल सकता है। लेकिन मैडम ने उन्हें समझाया कि ये घर इसलिए है कि ये कुछ निराधार लोगों की मदद करते हैं और इस घर की विशेषता सहजता से नहीं होती है बल्कि अपने जीवन भर की संघर्षों, अनुभवों और ऊँच-नीचताओं के आधार पर ये लोग इस काम को करते हैं।
श्रीवास्तव परिवार काफी सोच-विचार करने के बाद अपने घर वापस लौटे। लेकिन उन्हें उस दरवाजे की आधी राह सभी अनुभवों, संघर्षों और स्वयं के भावों से चुकी हो चुकी थी। उन्होंने जीवन की सभी अपेक्षाओं को टूटने से बचाकर एक नयी पहेली देखने का फैसला किया था।
श्रीवास्तव परिवार के परिवार में सबको उनके फैसले से खुश नहीं था, लेकिन उन्होंने निर्णय पर अटल थे। इस कथा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्होंने खुशी और दुख दोनों के अनुभव किए। फिर भी, उनके जीवन पर कई दुखद घटनाएं मदद करती रहीं, जैसे कि उन्होंने देखा कि कई लोगों को उनकी मदद की जरूरत होती थी, और उन्होंने उनकी मदद की।
दुख और खुशी से घिरा श्रीवास्तव परिवार घर को छोड़कर हमेशा के लिए समाज सेवा का काम करने के लिए निकले और लोगों को समझाते हुए लाते रहे कि क्यों हम अपने आसपास अन्य लोगों की मदद करिए।
उन्होंने जीवन में ऐसे कई अनुभव किये जो उन्हें अंतिम में इन शब्दों में संग्रहित कर दिए गए हैं:
“किसी से दोस्ती नहीं करते, संजीदगी से दोस्ती किये जाते हैं।”
नए देश में रहने वाले श्रीवास्तव परिवार के सदस्यों ने सोचा था कि वे एक नए इलाके में घर ढूंढेंगे, लेकिन इस अनोखे दरवाजे ने उन्हें उनकी खोज को एक नया आयाम दिया था। यह एक नया पहलु काम करने के लिए उन्हें जागरूक करती है।
इस अनोखे दरवाजे ने श्रीवास्तव परिवार को बदला और उनके जीवन के सामाजिक अर्थों के साथ साथ बहुत सारी नई ज़िन्दगियों को अनुभव करने का मौका भी दिया। इसीलिए उन्होंने अपने जीवन में दूसरों की मदद करने के लिए सुबह जल्दी उठ कर जाने लगे।
इस कथा के अंत में उस बड़े ही अनोखे दरवाजे ने हमें सुन्हेरी विशेषताओं की एक नई दुनिया की शुरुआत दी।