एक आशा
एक छोटी सी लड़की थी। उसका नाम अंजलि था। वह बहुत मेहनती थी। उसके अभिभावक बहुत गरीब थे। इसलिए उसे एक सरकारी स्कूल में एडमिशन दिलाया गया था।
अंजलि को स्कूल जाना बहुत पसंद नहीं था। उसे स्कूल में पढना नहीं आता था। उसके सभी दोस्त स्कूल में उससे आगे थे। वह यह सोचती रहती थी कि उसको अधिक संभावनाएं नहीं हैं।
एक दिन, उसका गांव में एक ग्रामीण मेला लगा था। अंजलि भी अपनी माँ के साथ मेले में गई थी। वह एक जादुई झाड़ू देखी। वह झाड़ू जो कि जादुई जादू से लदा हुआ था। अंजलि ने उस जादुई झाड़ू को देख लिया और उसे खरीद लिया। वह नहीं जानती थी कि उस झाड़ू में कोई जादुईत्व है या नहीं।
घर वापसी पर अंजलि ने झाड़ू को प्रयोग करने का प्रयास किया। अचानक, उसे यह समझ में आया कि झाड़ू से वह एक आदमी को देख सकती थी। अब वह झाड़ू से प्रेरित हुई और उसकी पढाई में मेहनत करने लगी।
अगले दिन से उसने स्कूल में भी मेहनत करना शुरू कर दिया। उसने अपने सभी विषयों में बढ़ोतरी करने का प्रयास किया और उसके शुरू होने से पहले ही उसने पढ़ाई करना शुरू कर दिया।
उसके अध्ययन का उस जादुई झाड़ू ने उसे साथ दिया। वह झाड़ू उसके सबसे अच्छे दोस्त बन गया था। उसको यह समझ में आ गया था कि उसमें से ही उसकी शक्ति आती है।
अंजलि के लिए स्कूल जाना अब एक मजे का काम हो गया था। उसने अपने विषयों में बढ़ई के कार्य के अलावा उसने नाटक, नृत्य, और स्पोर्ट्स भी में हिस्सा लिया।
एक दिन, उसके स्कूल में एक नृत्य का प्रतियोगिता आयोजित की गई। अंजलि ने भी इसमें हिस्सा लिया। उसने वो नृत्य जीता। सभी उसे बधाई देने लगे। उसकी मदद जादुई झाड़ू ने भी की थी।
अंजलि के जीते हुए प्रतियोगिता की खबर पारिवारिक सदस्यों तक पहुंच गई थी। उन्होंने अंजलि के उत्तेजना भरे प्रभाव के साथ समझाया कि उसे अपने सपने सच करने होंगे और उसे अपनी पढाई पर और अधिक मेहनत करनी होगी।
यह सुनते हुए, अंजलि को रुचि हो गई। उसे इस बात का पाता चल गया था कि से सभी सपने सच कर सकते हैं अगर वे मेहनत करें।
उसने ग्रामीण समुदाय से सहायता मांगी और वह भी उसकी मदद करने के लिए तैयार थे। उसने सभी लोगों की मदद से वह जगह प्राप्त की जहां उसे अधिक संभावनाएं मिली। उसके पड़ोस में एक गांव में एक बड़ी पुस्तकालय थी।
अंजलि उस लाइब्रेरी के बारे में जानने के लिए उस पुस्तकालय में गई और वहाँ पर जादू से भरे हुए भारतीय और विदेशी किताबों का संग्रह देखा। वह था कि अंजलि ने सोचा कि उसके सभी सपनों को पूरा करने के लिए उसके पीछे मेधा होनी चाहिए।
वह अपनी पढाई पर जोर देने लगी। उसने सीखा कि जब तक उसमें से सही आकार नहीं बन जाते, तब तक वह अपने विषयों में और महनत करेंगे।
उसने एग्जाम दिया और वह पास हुई। उसने अभिभावकों को गर्व के साथ बताया कि वह अब आगे बढ़ने की राह पर है। उसने जीते हुए नृत्य प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया और उसे इस बात का अनुभव हुआ कि उसके दोस्त अब उससे आगे नहीं हैं।
उसका उत्साह लगातार बढ़ता गया और उसने अधिक संभावनाओं को अपने पास लाया। वह स्कूल में ही मास्टर ऑफ अर्ट कुर्स के लिए भी चयनित हुई।
इस तरह, अंजलि ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत और लगन से काम किया और अपने अभिभावकों को गर्व कराया। उसने समझा कि अगर हम गर्व से दुनिया में खड़े होंगे तो दुनिया भी हमें गर्व से देखेगी।
इस प्रकार उसकी एक छोटी सी आशा उसे एक महान व्यक्ति बना दी थी। वह हमेशा अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेहनत और उत्साह से काम करती रही थी।