नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ में, जहां हम बॉलीवुड की हर चटपटी खबर पर कांव-कांव करके अपनी पैनी नजर रखते हैं। हाल ही में लाइवमिंट की एक रिपोर्ट ने एक नई बहस छेड़ दी है – ‘क्या अंग्रेजी रिलीज के सहारे भारतीय फिल्में देसी प्रवासियों (NRI) के दायरे से बाहर निकलकर ग्लोबल ब्लॉकबस्टर बन सकती हैं?’
न्यू जर्सी वाले शर्मा जी से आगे की सोच!
जरा सोचिए, अब तक हमारी हिंदी और साउथ फिल्मों का ओवरसीज बिजनेस सिर्फ न्यू जर्सी, लंदन या दुबई में बसे एनआरआई भाइयों के भरोसे चलता था। वही अंकल-आंटी थिएटर में पॉपकॉर्न खाते हुए भावुक होते थे, जिन्हें भारत की याद सताती थी। लेकिन क्या भारतीय सिनेमा सिर्फ भारतीय मूल के लोगों तक सीमित रहना चाहिए? ‘आरआरआर’ (RRR) की नाटू-नाटू वाली ऑस्कर जीत और ‘दंगल’ का चीन में तहलका इस बात का सबूत है कि हमारे देसी मसाले में विदेशी दर्शकों को भी नचाने का पूरा दम है।
जब पुष्पा बोलेगा: “I Will Not Bow Down!”
अब असली सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ सबटाइटल्स काफी हैं या हमारी फिल्मों को अंग्रेजी में डब होकर बड़े पैमाने पर रिलीज होना चाहिए? जरा कल्पना कीजिए कि जब अल्लू अर्जुन अंग्रेजी में कहेंगे, “Pushpa means flower, but I am fire!” या फिर रजनीकांत का कोई डायलॉग अंग्रेजी में गूंजेगा, तो हॉलीवुड के दर्शकों का क्या रिएक्शन होगा? क्या अंग्रेज दर्शक भारतीय फिल्मों में गानों के बीच अचानक हीरो-हीरोइन के नाचने के लॉजिक को अंग्रेजी भाषा में आसानी से पचा पाएंगे?
कोरियाई सिनेमा ने ‘पैरासाइट’ और ‘स्क्विड गेम’ के जरिए साबित कर दिया है कि अगर कंटेंट में दम हो, तो भाषा कोई दीवार नहीं बनती। लेकिन भारतीय सिनेमा का फ्लेवर थोड़ा अलग है। यहां सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि इमोशन, ड्रामा और लार्जर-देन-लाइफ एक्शन होता है। अगर ‘कल्कि 2898 एडी’ या ‘बाहुबली’ जैसी फिल्मों को सही अंग्रेजी डबिंग के साथ पेश किया जाए, तो ये मार्वल और डीसी की फिल्मों को भी कड़ी टक्कर दे सकती हैं।
‘काक-वाणी’ का फैसला: अंग्रेजी चाल, पर देसी ढाल!
कुल मिलाकर बात सीधी है – अंग्रेजी डबिंग से दुनिया भर के थिएटर्स के दरवाजे तो खुल सकते हैं, लेकिन विदेशी दर्शकों को कुर्सी से बांधे रखने के लिए फिल्म की ‘देसी आत्मा’ बची रहनी चाहिए। अगर अंग्रेजी बोलने के बावजूद विदेशी दर्शक थिएटर में ‘सीटी’ बजाना सीख जाएं, तभी हमारी फिल्मों का असली ब्रेकआउट माना जाएगा!
तो दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या अंग्रेजी अवतार में हमारी फिल्में पूरी दुनिया पर राज कर पाएंगी? अपनी राय कमेंट में बताइए और पढ़ते रहिए ‘काक-वाणी’!
संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें