सिनेमा जगत में इन दिनों एक नया बुखार चढ़ा है, और उस बुखार का नाम है ‘पैन-इंडिया’। चाहे फिल्म की कहानी में दम हो या न हो, लेकिन पोस्टर पर ‘पैन-इंडिया’ लिखना आज के दौर का सबसे बड़ा मार्केटिंग टूल बन चुका है। इसी बीच, साउथ सिनेमा के ‘नेचुरल स्टार’ यानी हमारे चहेते एक्टर Actor Nani ने इस ‘पैन-इंडिया’ टैग पर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। काक-वाणी की पैनी नजर से आखिर यह खबर कैसे बच सकती थी!
आखिर नानी को क्यों पसंद नहीं ‘पैन-इंडिया’ का ठप्पा?
एक हालिया इंटरव्यू के दौरान जब नानी से उनकी फिल्मों और पैन-इंडिया रिलीज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाक अंदाज में इस टैग की क्लास लगा दी। नानी का मानना है कि फिल्मों को ‘पैन-इंडिया’ कहकर अलग से बेचना अब बंद होना चाहिए। उन्होंने एक बेहद लॉजिकल सवाल उठाया कि जब कोई बड़ी हिंदी फिल्म पूरे देश में रिलीज होती है, तो उसे ‘पैन-इंडिया’ क्यों नहीं कहा जाता? फिर सिर्फ साउथ की फिल्मों को ही इस विशेष टैग के साथ क्यों पेश किया जाता है?
नानी ने साफ शब्दों में कहा कि सिनेमा तो सिनेमा होता है, उसे भाषाओं और क्षेत्रों की दीवारों में क्यों कैद करना? अगर फिल्म की कहानी में दम है, तो वह बिना किसी टैग के भी पूरे भारत के दर्शकों के दिलों को छुएगी। इस तरह के टैग्स सिर्फ बिजनेस चमकाने के पैंतरे हैं, जिनका असली कला से कोई लेना-देना नहीं है।
काक-वाणी का तीखा चश्मा: मार्केटिंग का नया खेल
देखा जाए तो नानी की बात में सौ टका दम है। आजकल तो बजट छोटा हो या बड़ा, हर दूसरी फिल्म के साथ ‘पैन-इंडिया’ का ढिंढोरा पीटा जाने लगता है। बॉलीवुड वाले भी अब साउथ के स्टार्स के साथ कोलाबोरेट करके खुद को इस रेस में बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन नानी ने यह साबित कर दिया है कि वह सिर्फ एक बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक सुलझे हुए कलाकार भी हैं, जो केवल कंटेंट पर भरोसा रखते हैं, न कि किसी खोखले टैग पर।
अब देखना यह होगा कि नानी के इस बेबाक बयान के बाद क्या फिल्ममेकर्स अपनी सोच बदलेंगे? क्या वे फिल्मों को सिर्फ ‘फिल्म’ की तरह प्रमोट करेंगे या फिर ‘पैन-इंडिया’ का यह गुब्बारा ऐसे ही हवा में उड़ता रहेगा? बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के इस मजेदार घमासान की हर खबर के लिए जुड़े रहिए काक-वाणी के साथ!
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