Title: ख्वाबों की उड़ान (Khwaabon ki Udaan)
वर्ष 1995 का था। एक सीधे साधे परिवार में पैदा हुआ एक लड़का था। नाम था अजय। स्कूल में पढ़ने के बाद वह अपनी माँ के घर-गृहस्थी में मदद करता था। अजय के पिता की मृत्यु के बाद, माँ को बच्चे को पढ़ाने और उसकी देख-रेख करने में बहुत मुश्किलें उठानी पड़ी थीं।
अजय का सपना हमेशा से एक उच्च शिक्षा पाने का था। वह रोज स्कूल से लौटते हुए एक पाठशाला से गुजरता था और उस बच्चे को देखता जो उच्च विद्यालय में पढ़ने जाना चाहता था। कुछ दिनों बाद उस बच्चे का नाम पता चला – उसका नाम हरिश था। उसने एक दिन उसे आकर्षित करते हुए पूछा कि उसकी सोच क्या है।
“मैं एक डाक्टर बनना चाहता हूँ,” हरिश बोला।
अजय का मन भी कुछ इसी तरह की सोच से भरा होता था। वह भी डाक्टर बनना चाहता था। उसकी माँ एक डाक्टर की बेटी थी लेकिन उसने उसे पढ़ाने के लिए बहुत मेहनत की थी। अजय के घर का कोई आईना नहीं था। उसके साथ उसकी माँ भी चीखती और रोती रहती थी। वह अपनी माँ की मानसिक सहायता करना चाहता था और एक डॉक्टर बनकर अपने परिवार के लिए मदद करना चाहता था।
एक दिन, अजय के स्कूल में एक अधिकारी आया। उसने बताया कि एक प्रतियोगिता होगी जो उच्च शिक्षा के लिए छात्रों की नियुक्ति के लिए थी। अजय ने इस के बारे में हरिश को बताया और यह सोचा कि दोनों मिलकर इसे जीत सकते हैं। उन्होंने अपने आधा दिन जीतने और आखिरी लम्हे का भी भरपूर इस्तेमाल करते हुए इसे जीत लिया।
अब अजय और हरिश अपने सपनों के नज़दीक थे। उन्होंने एक अच्छे से स्कूल में नियुक्ति प्राप्त की और साथ ही एक बड़े अस्पताल में ट्रेनिंग के लिए भी चुना गया। अजय ने खुशी से आपने सपनों की उड़ान उड़ाना शुरु कर दिया था। उसने और मेजबानी करने की इच्छा और दृढ़ता में इजाद करते हुए, जीत हासिल करने के पहले से भी ज्यादा मेहनत करना शुरु कर दिया।
अजय और हरिश ने अपने सपनों को पूरा करने और एक सफल डॉक्टर बनने के लिए संघर्ष किया और अपनी क्षमताओं को पूरी तरह से समझा। वे अपने समय के सबसे अच्छे डॉक्टर बने और दुनिया के लोगों का मानसिक समृद्धि बढ़ाने में मदद करते रहे। वे अपने उच्च शिक्षा से न सिर्फ अपने परिवार और मुल्क के लिए प्रभावशाली बने बल्कि अधिक से अधिक लोगों को मदद कर सके। अजय ने हमेशा सपनों की उड़ान उड़ाती रही और अपने जीवन को एक अधिक से अधिक महत्वपूर्ण और समर्थ तरीके से जिया।