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गांव की भटकती आत्मा एक एेसे गाँव में एक शहर से

गांव की भटकती आत्मा

एक एेसे गाँव में एक शहर से आई लड़की पर बुरी नजर थी। लोग उस से दूर भागते थे, उस से बात नहीं करते थे और उसे अपने आस-पास नहीं आने देते थे। लड़की को आत्मविश्वास की कमी होती जा रही थी और वह जिंदगी से हार रही थी।

एक दिन, गांव में एक समाज सेवी आयी और लड़की के बारे में सुनकर उससे मिलना चाहती थी। लड़की ने उसे देखते ही भीड़ से भागते हुए तंग आकर उसे घर में भेज दिया।

लेकिन समाज सेवी कुछ देर में फिर से आयी और इस बार लड़की से बात करने वाली थी। लड़की इस बार सिर्फ थोड़ा अंतर्राष्ट्रीय हुई थी। वह स्वयंसेवका से बात करने के लिए राजी हो गई।

लड़की को पहली बार किसी ने सच्चा प्यार दिया था। स्वयंसेवका ने उससे कुछ अप्रतिम बातें कीं, उसका आत्मविश्वाय बढ़ाया और उसके साथ मजबूत दोस्ती की। स्वयंसेवका ने उससे लड़की को स्कूल में भी जाने का प्रेरणा दिया और उससे रोज़ बात कर रहा था।

लड़की अपने नए दोस्त से बहुत खुश थी। लेकिन इस खुशी के साथ उसे अपने लोगों द्वारा जो पीड़ा दी गई थी, इसे भी हलका नहीं कर सकती थी। एक दिन, उसे गांव के सबसे पुराने पेड़ के नीचे बैठते हुए देखा गया था। उसे लगता था कि उसमें कुछ बुरा हो गया था। वह वहाँ उसके पास गई और उसे छूने की कोशिश की। एक भयानक प्राणी ने उसे काट लिया था और लड़की बेहोश हो गई।

स्वयंसेवका के कहने से, लड़की को अस्पताल ले जाया गया और उसे नए जगह पर रखा गया। उसके अवसान के बाद, स्वयंसेवका ने अपने रोज़ आत्मविश्वास बढ़ाने वाले बातों से लड़की के माता-पिता को समझाया। वह उन्हें स्कूल में जाने के लिए मना करते थे। स्वयंसेवका ने उन्हें उसके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं से रूबरू कराया जाने लगा था।

अब लड़की स्कूल जाने लगी थी, लोगों से भीड़ में थोड़ी बातें करती थी और आत्मविश्वास के साथ जी रही थी। वह स्वयंसेवका के सहारे से खुश थी और उसके पास हमेशा सहायता मिलती थी। लोग उसे अपना सम्मान देने लगे थे। उसके माता-पिता परिवार से अलग रहने वाली बेटी को हमेशा कुछ अलग लगता था।

लड़की अब एक सफल लेडी बन गई थी। उसने एक साधारण जीवन से उठकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाया था। वह लोग करीब आने लगी थीं, बातें करने लगी थीं और नए मित्रों से मिलने लगी थीं। उसकी जीवन के मूल अंदोलनों में से एक था आत्मविश्वास।

इस गाँव में एक भटकती आत्मा थी, जो लोगों से भागती रहती थी, लेकिन अब वह एक सफल व्यक्ति थी। वह कमजोर नहीं थी। उसने अपने आत्मविश्वास को बढ़ाया था, जो इसे उसके भीतर से मजबूत बना देता था।

कागा जी

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