जब नागार्जुन के ‘स्वैग’ के मुरीद हुए थे हिंदी दर्शक, इन डब फिल्मों ने रातोंरात बनाया था उन्हें ‘किंग’!

आज जब ‘पुष्पा’, ‘आरआरआर’ या ‘बाहुबली’ जैसी फिल्में हिंदी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाती हैं, तो इसे ‘पैन-इंडिया’ ट्रेंड कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस ट्रेंड की नींव दशकों पहले ही रखी जा चुकी थी? और इस सुनहरे इतिहास के असली ‘पोस्टर बॉय’ कोई और नहीं, बल्कि साउथ के चार्मिंग स्टार नागार्जुन हैं! आज ‘काक-वाणी’ के चटपटे गलियारे में हम खंगालेंगे वो कहानी कि कैसे डब फिल्मों ने नागार्जुन को हिंदी दर्शकों का चहेता ‘किंग’ बना दिया।

‘शिवा’ और ‘गीतांजलि’: जब हिंदी बेल्ट में गूंजा नागार्जुन का नाम

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नागार्जुन का हिंदी दर्शकों से पहला और सबसे मजबूत कनेक्शन दो फिल्मों के जरिए हुआ था। पहली थी राम गोपाल वर्मा की कल्ट क्लासिक ‘शिवा’ (Shiva)। जब इस फिल्म को हिंदी में डब करके रिलीज किया गया, तो नागार्जुन का वो एंग्री यंग मैन वाला अंदाज और हाथ में साइकिल की चेन लपेटकर गुंडों को पीटना दर्शकों के दिलों में छप गया। कॉलेज पॉलिटिक्स पर बनी इस फिल्म ने नागार्जुन को रातोंरात हिंदी बेल्ट का एक्शन हीरो बना दिया।

दूसरी फिल्म थी मणिरत्नम की रोमांटिक ड्रामा ‘गीतांजलि’ (Geethanjali)। जहां ‘शिवा’ में नागार्जुन का खूंखार एक्शन रूप दिखा, वहीं ‘गीतांजलि’ के डब वर्जन ने उनकी लवर-बॉय वाली इमेज को दर्शकों के सामने पेश किया। इन दोनों फिल्मों के कॉम्बिनेशन ने हिंदी दर्शकों को नागार्जुन के अभिनय की विविधता से रूबरू कराया और उन्हें एक मुकम्मल स्टार बना दिया।

टीवी और यूट्यूब पर ‘मास’ और ‘डॉन’ का कहर

अगर थिएटर में ‘शिवा’ ने शुरुआत की थी, तो घरों के टीवी स्क्रीन्स पर ‘मेरी जंग: वन मैन आर्मी’ (Mass) और ‘डॉन नंबर 1’ जैसी फिल्मों ने नागार्जुन के स्टारडम को अमर बना दिया। 90 और 2000 के दशक में जन्मे बच्चों के लिए वीकेंड का मतलब सेट मैक्स या ज़ी सिनेमा पर नागार्जुन की फिल्में देखना होता था। सफेद शर्ट पहनकर, आंखों पर काला चश्मा चढ़ाए जब नागार्जुन स्क्रीन पर आते थे, तो थिएटर्स जैसी तालियां घरों में बजती थीं। उनका वो डायलॉग- “नया साल तो हर साल आता है, लेकिन मास हर रोज नहीं आता!” आज भी मीम्स की दुनिया में राज करता है।

काक-वाणी की राय

नागार्जुन की इन फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी और स्टार में दम हो, तो भाषा की दीवारें रेत के महल की तरह ढह जाती हैं। आज के पैन-इंडिया स्टार्स असल में उसी रास्ते पर चल रहे हैं, जिसे नागार्जुन ने सालों पहले तैयार किया था। तो दोस्तों, ‘किंग’ नागार्जुन का वो स्वैग आज भी उतना ही फ्रेश है जितना सालों पहले था। आपको उनकी कौन सी डब फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? हमें जरूर बताएं!


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कागा जी