तिलचट्टों की ‘क्रान्ति’ और मंत्री जी का इस्तीफा: जब बीबीसी ने ढूंढा भारत का असली ‘पेस्ट कंट्रोलर’!

वाह! धन्य है हमारी भारतीय राजनीति और धन्य हैं हमारे गोरे साहबों का बीबीसी चैनल, जिन्हें भारत की सड़कों पर घूमते तिलचट्टों (कॉकरोच) में भी लोकतंत्र की बहाली का नया हथियार दिख जाता है। खबर आई है कि अभिजीत दिपके नामक एक छात्र नेता ने कुछ ऐसे ‘क्रांतिकारी’ तिलचट्टों का नेतृत्व किया, जिससे घबराकर एक माननीय मंत्री जी को अपना इस्तीफा सौंपना पड़ गया। अब तक हम सोचते थे कि सरकारें सीबीआई, ईडी या विपक्ष के हमलों से गिरती हैं, पर ‘काक-वाणी’ के मंच से आज हम यह स्वीकार करते हैं कि असली ताकत तो घर के कोनों में छिपे उन छह पैरों वाले जीवों में थी, जिन्हें हम बेकार में ‘हिट’ छिड़ककर मारते आ रहे थे।

क्रांति का नया सिपाही: कॉकरोच!

सोचिए, जिस देश में करोड़ों के घोटाले और बड़ी-बड़ी रैलियां मंत्रियों का बाल भी बांका नहीं कर पातीं, वहां कुछ तिलचट्टों ने कमाल कर दिया। अभिजीत दिपके ने शायद डार्विन के सिद्धांत को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। उन्होंने साबित कर दिया कि सत्ता के गलियारों में जो जीव सबसे ज्यादा ‘सर्वाइव’ कर सकता है, वह नेता नहीं बल्कि कॉकरोच है। जब यह विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ होगा, तो मंत्री जी ने सोचा होगा कि छात्र ही तो हैं, पानी की बौछार मारेंगे तो भाग जाएंगे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि इस बार मुकाबला इंसानों से नहीं, बल्कि परमाणु हमले में भी जिंदा बच जाने वाले तिलचट्टों की फौज से था!

बीबीसी की खोजी पत्रकारिता और ‘पेस्ट कंट्रोल’

इधर लंदन में बैठे बीबीसी के पत्रकारों को जब यह पता चला, तो उनकी बांछें खिल गईं। उन्हें लगा कि भारत में लोकतंत्र बचाने का इससे बेहतरीन ‘कीट-पतंग’ मॉडल और कोई हो ही नहीं सकता। “द स्टूडेंट बिहाइंड कॉकरोच प्रोटेस्ट” – शीर्षक पढ़कर ऐसा लगता है मानो अभिजीत दिपके कोई आधुनिक ‘स्पाइडरमैन’ हैं, जो जालों की जगह तिलचट्टे फेंकते हैं। इस ऐतिहासिक कवरेज के बाद, अब भारतीय मंत्रियों को अपनी सुरक्षा में जेड-प्लस श्रेणी के कमांडो के बजाय ‘पेस्ट कंट्रोल’ की एक टीम हमेशा साथ रखनी पड़ेगी। क्या पता कब कौन सा छात्र जेब में दो-चार क्रांतिकारी कॉकरोच लेकर आ जाए और सीधे इस्तीफे पर दस्तखत करा ले!

नेता जी, विपक्ष से नहीं, रसोई से डरिए!

इस पूरे प्रकरण से जो सबसे बड़ा सबक मिला है, वो यह है कि अब राजनीतिक दलों को अपने घोषणापत्र में ‘कीटनाशक मुक्त भारत’ या ‘कॉकरोच सुरक्षा गारंटी’ जैसे वादे शामिल करने चाहिए। मंत्रियों को सलाह है कि वे विधानसभा या संसद जाने से पहले अपने घरों और दफ्तरों के कोनों की अच्छी तरह जांच करवा लें। जो मंत्री जनता की आवाज से नहीं डरते थे, आज वे बीबीसी की कृपा से एक छोटे से जीव के नाम से थर-थर कांप रहे हैं। वाकई, भारतीय लोकतंत्र अब सचमुच ‘जमीनी’ स्तर पर पहुंच चुका है, जहां फैसले अब इंसानों के वोट से नहीं, बल्कि रेंगने वाले जीवों के खौफ से तय हो रहे हैं!


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कागा जी