दिल्ली की पावन धरा पर राजनीति का स्तर इतना ऊंचा उठ चुका है कि अब इंसानों के साथ-साथ ‘कॉकरोच’ भी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए रैलियां निकालने लगे हैं। हाल ही में रायटर्स की एक रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी कि दिल्ली में प्रस्तावित एक बड़ी रैली से ठीक पहले ‘कॉकरोच मूवमेंट’ के कई सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। अब आप ही बताइए, जिस देश में परमाणु हमले से भी बच निकलने वाले कॉकरोचों को दिल्ली पुलिस की जीप में ठूंसा जाने लगे, वहां कानून-व्यवस्था की मुस्तैदी पर कौन सवाल उठा सकता है?
‘काला हिट’ और ‘लक्ष्मण रेखा’ से लैस प्रशासनिक मुस्तैदी
‘काक-वाणी’ के गुप्त सूत्रों के मुताबिक, इस खतरनाक आंदोलन को कुचलने के लिए दिल्ली पुलिस ने विशेष रणनीति बनाई है। वाटर कैनन की गाड़ियों में पानी की जगह साबुन का घोल भरा गया है और हर थाने को ‘काला हिट’ स्प्रे का भारी स्टॉक दिया गया है। देश के बड़े-बड़े आर्थिक अपराधी भले ही आराम से विदेश निकल जाएं, लेकिन अगर कोई कॉकरोच संसद या जंतर-मंतर की तरफ कदम बढ़ाए, तो हमारी व्यवस्था तुरंत हरकत में आ जाती है। यह हमारी सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता ही तो है कि किसी भी गंदगी फैलाने वाले जीव को सड़क पर आने से पहले ही नालियों में बंद कर दिया जाए।
राजनीतिक रोटियां और कॉकरोच-अधिकार
विपक्ष ने इस धरपकड़ को तानाशाही करार देते हुए आपातकाल जैसी स्थिति बताया है। एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने रोष प्रकट करते हुए कहा, “आज कॉकरोचों को दबाया जा रहा है, कल यह सरकार छिपकलियों, चूहों और खटमलों की अभिव्यक्ति की आजादी भी छीन लेगी।” वहीं दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया है कि ये कॉकरोच सामान्य नहीं हैं; इन्हें विदेशी रसोइयों और नाले के भू-माफियाओं द्वारा प्रायोजित किया गया है ताकि देश की साफ-सुथरी छवि पर दाग लगाया जा सके।
अमरता का वरदान और दिल्ली का राजनीतिक भविष्य
जीव विज्ञान का इतिहास गवाह है कि डायनासोर मिट गए, हिमयुग बीत गया, लेकिन कॉकरोच हमेशा जिंदा रहे। ठीक उसी तरह, दिल्ली की राजनीति में नेता आएं या जाएं, सरकारें बदलें या गिरें, यह आंदोलनकारी प्रजाति मंत्रालयों की फाइलों और सरकारी आवासों के कोनों में हमेशा बनी रहेगी।
काक-वाणी की गृह मंत्रालय को मुफ्त सलाह है कि इस आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस के बजाय घर-घर में काम करने वाली गृहणियों को तैनात किया जाए। धारा 144 से कॉकरोच डरें न डरें, लेकिन एक पुरानी चप्पल और झाड़ू का जो खौफ इनमें होता है, वह इतिहास सिद्ध है!
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