‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ का दिव्य दर्शन: फिर से ‘लॉन्च’ होते हमारे युवराज!

अहा! ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ के गोरे साहबों को आखिरकार परम ज्ञान प्राप्त हो ही गया। उन्होंने सात समंदर पार से दूरबीन लगाकर भारत की राजनीति का सबसे बड़ा रहस्य खोज निकाला है। उनका कहना है कि भारत में एक राजनैतिक घराने का ‘चश्म-ओ-चिराग’ अपना ‘मौका’ भुनाने की कोशिश कर रहा है। वाह! क्या अद्भुत खोज है! इस महान शोध के लिए तो न्यू यॉर्क के पत्रकारों को तुरंत किसी बड़े पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए। हमें तो अज्ञानी जनता की तरह पता ही नहीं था कि हमारे युवराज पिछले बीस सालों से आखिर कर क्या रहे थे!

सात समंदर पार से आया ‘रिलांच’ का नया प्रमाण पत्र

काक-वाणी के प्रिय पाठकों, जरा गंभीरता से सोचिए! जब तक अमरीका का कोई नामचीन अखबार किसी भारतीय नेता पर अपनी मुहर न लगा दे, तब तक उसका ‘राजनीतिक अवतार’ अधूरा ही माना जाता है। ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ ने जैसे ही लिखा कि युवराज अपना ‘मोमेंट’ पकड़ने की जुगत में हैं, वैसे ही लुटियंस दिल्ली के दरबारी पत्रकारों की बांछें खिल गईं। अब कोई यह सवाल पूछने की जुर्रत नहीं कर सकता कि यह कौन सा वाला ‘मोमेंट’ है—2009 का, 2014 का, 2019 का या फिर 2024 का? अरे भाई, जब तक मोमेंट पूरी तरह हाथ न आ जाए, तब तक हर दो-तीन साल में एक नया ‘री-री-लॉन्च’ तो बनता ही है!

‘मोमेंट’ पकड़ने की अनवरत और थकाऊ तपस्या

इन पश्चिमी ज्ञानियों को क्या मालूम कि हमारे देश में ‘राजनीतिक वारिस’ होना कितना कष्टदायक काम है! हर चुनाव हारने के बाद हमारे अपने चाटुकार घोषित कर देते हैं कि युवराज अब ‘गंभीर’ और ‘परिपक्व’ हो चुके हैं। लेकिन फिर भी, ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ को दूरबीन लगाकर लिखना पड़ता है कि वे अभी भी ‘कोशिश’ ही कर रहे हैं। सोचिए, एक इंसान अपनी पूरी जवानी देश के लिए सिर्फ एक ‘सही मोमेंट’ ढूंढने में ही न्योछावर कर दे, और वह मोमेंट हर बार गीले साबुन की तरह हाथ से फिसल जाए, तो इसमें भला किसकी गलती है? उस मोमेंट की, जनता की या फिर बेचारगी से भरे युवराज की?

काक-वाणी का कड़वा और कांव-कांव सच

काक-वाणी की तीखी कौआ-दृष्टि यह साफ देख रही है कि विदेशी मीडिया का यह ‘राजशाही प्रेम’ भी कमाल का है। उन्हें 140 करोड़ की आबादी वाले इस विशाल लोकतंत्र में केवल एक ‘वंशज’ का संघर्ष ही सबसे दिलचस्प दिखाई देता है। यह लोकतंत्र का ऐसा अनोखा नाटक है जहाँ ‘मौका’ खुद युवराज के हाथ में आने का इंतजार करते-करते बूढ़ा हो चुका है, लेकिन युवराज हैं कि हर बार एक नए ब्रांडेड कुर्ते और नई यात्रा के साथ ‘आगमन’ की तैयारी में ही लगे रहते हैं। खैर, अब जब न्यू यॉर्क के ज्ञानियों ने हरी झंडी दिखा ही दी है, तो देखना यह है कि इस बार ‘मोमेंट’ पकड़ा जाता है या हमेशा की तरह अगले चुनाव के ‘री-रिलांच’ का इंतजार करता है!


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कागा जी