घने जंगल का विशाल रक्षक
विंध्याचल के विशाल और घने जंगलों में सोमू नाम का एक शक्तिशाली हाथी रहता था। वह न केवल जंगल का सबसे बलवान प्राणी था, बल्कि अत्यंत दयालु भी था। जब भी जंगल में कोई जीव संकट में पड़ता, सोमू हमेशा उसकी सहायता के लिए तत्पर रहता था। एक बार भारी बारिश के कारण आई बाढ़ में, सोमू ने अपनी विशाल सूंड का सहारा देकर नील नाम की एक नन्हीं गौरैया और उसके घोंसले की जान बचाई थी। उस दिन नील ने सोमू के इस उपकार को अपने छोटे से दिल में सदा के लिए बसा लिया था।
समय का चक्र और अकेलापन
समय बीतता गया और कुदरत के नियम के अनुसार सोमू धीरे-धीरे बूढ़ा होने लगा। उसकी आँखों की रोशनी धुंधली हो गई और शरीर की ताकत भी कम होने लगी। जो जानवर कभी सोमू की एक चिंघाड़ पर उसकी मदद के लिए भागते थे, अब वे उसका उपहास उड़ाने लगे और उसे लाचार छोड़कर चले गए। अंधा और कमजोर सोमू जंगल के एक एकांत कोने में रहने लगा। लेकिन नील उसे कभी नहीं भूली। वह हर सुबह सोमू के पास आती, उसे मीठे फल ढूंढकर देती और दिनभर उसकी संगिनी बनकर रहती।
जंगल में भयानक विपत्ति
एक भीषण गर्मी के दिन, जंगल में भयानक आग लग गई। सूखे पत्तों और तेज हवाओं के कारण आग की लपटें आसमान छूने लगीं। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। सभी जानवर अपनी जान बचाकर भागने लगे, लेकिन किसी ने भी असहाय सोमू की सुध नहीं ली। धुएँ के गुबार से घिरा सोमू रास्ता भटक गया और आग की लपटें उसके करीब आने लगीं। सोमू ने अपनी मृत्यु को निकट देखा और उसकी आँखों से लाचारी के आँसू बह निकले।
कृतज्ञता और सच्ची मित्रता की मिसाल
तभी नन्हीं नील उड़ती हुई वहाँ पहुँची। उसने सोमू को रोते देखा तो कहा, “मित्र सोमू, हिम्मत मत हारो! जब तक मेरी साँसें चल रही हैं, मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगी।” नील धुएँ से ऊपर उड़ी और अपनी तेज़ नज़र से सुरक्षित रास्ता खोज निकाला। वह सोमू के कान के पास मंडराने लगी और उसे दिशा बताने लगी, “सोमू दादा, तीन कदम दाहिने… अब सीधे चलो… अब बाएँ मुड़ो!”
नन्हीं गौरैया की आवाज़ सोमू के लिए अंधकार में रोशनी बन गई। सोमू ने उस पर पूरा विश्वास किया और उसके बताए रास्ते पर चलता रहा। कुछ ही देर में, दोनों आग के भयानक घेरे से बाहर सुरक्षित नदी के किनारे पहुँच गए। सोमू की जान बच चुकी थी। उसने नील को अपनी सूंड पर बैठाया और भावुक होकर कहा, “आज एक विशाल हाथी को एक नन्हीं चिड़िया के प्रेम और वफादारी ने जीवनदान दिया है।”
कहानी की सीख
नैतिक शिक्षा: इस पंचतंत्र की नैतिक कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि आकार या शारीरिक ताकत कभी किसी का मूल्य तय नहीं करती। संकट के समय काम आने वाली कृतज्ञता और निस्वार्थ प्रेम ही सबसे बड़ा बल है। सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय आपका साथ न छोड़े।