बेटी का सुनहरा सपना
एक छोटी सी बच्ची है, जिसका नाम नीरू है। नीरू की पैदाइश एक सामान्य परिवार में हुई थी। जब वह नौ माह की हुई तो उसकी माँ ने उसे जिम्मेदारी समझाई थी कि वह अपनी शिक्षा अच्छी तरह से पूर्ण करे और एक अच्छी नागरिक होने का सपना देखे।
नीरू के परिवार में कोई सम्मानित व्यक्ति नहीं था। उनका घर मुश्किल से दो कमरे का था और खाना अपने घर में ही बनाकर खाते थे। लेकिन नीरू का सपना बहुत बड़ा था। वह अपने आप को एक डॉक्टर बनते हुए देखती थी। उसके मन में हमेशा यही सपना होता था कि वह लोगों को मुस्कुराने की वजह बनाएगी।
नीरू को शिक्षा के महत्व के बारे में जानकारी दी गई और इसी सोच के साथ वह अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। उसने हमेशा से उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए और उसने दुनिया में कहा हुआ सपना पाने के लिए बहुत मेहनत की। उसकी माँ उसके सपने को पूरा करने में सक्षम नहीं थी, लेकिन उसने कभी भी नीरू को रोकने की कोशिश नहीं की।
नीरू का सपना लोगों को मुस्कुराने के सिवा और भी अधिक उत्कृष्ट हो गया। जब नीरू उंची शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाने लगी, तो उसने अपने दर्शकों के दिलों में एक अटूट स्थान बना लिया। उसके जादूगर जैसे करतब लोग किसी भी अन्य अभिनेता द्वारा दिखाए गए करतबों से भी बेहतर थे।
नीरू सभी उम्र के लोगों के दिलों में बस जाती थी, चाहे वह बच्चे हों या बूढ़े। उसने शौक शो में आना शुरू किया और उसकी मेहनत उसे वहाँ तक ले गई जहाँ उसका सपना पूरा होता हुआ नजर आने लगा।
उसने फिल्मों में काम किया और अभिनय की उसकी कला में जादू था। उसने संगीत, डांस और अभिनय का मिश्रण पेश किया और लोगों के दिलों में जगह बनाई।
नीरू के सपनों को पूरा करने में शेष कुछ था। वह उस समय अमेरिका में फिल्म शूट कर रही थी। उसके दोस्तों ने उसे एक खास स्थान दिखाया जहाँ उससे मिलने आए लोग अपने सपनों की बातें करते थे।
जब नीरू वहाँ पहुंची, तो उसने एक बेटी की बुलाई वाले आवाज को सुना। उस बच्ची के पिता ने उसके विषय में बताया कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए आई है और उसकी आँखों में आज भी उसी सपने की भावना लगी थी। बेटी ने नीरू के हाथ थामते हुए कहा कि वह भी एक बेटी है और अपनी माँ से हमेशा यह सीख मिली होती है कि सपनों को पूरा करना बहुत जरूरी है।
नीरू को उस अनुभव से बहुत सी शिक्षा मिली। उसका सपना मुस्कुराने वालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ किसी भी बेटी को सपनों को पूरा करने के लिए जागरूक करने का भी होता है। उसने अपने जीवन को एक नयी दिशा दी और अब उसका सपना था कि उसे दुनिया में बेटियों के सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें एक साथ जोड़े।
नीरू की कला, उसकी संवेदनशीलता व उसकी मेहनत ने उसे संचालित किया और उसने एक संगठन शुरू किया, जो दुनिया में बेटियों को समर्थ बनाने के लिए मेहनत करता है। वह संगठन आज दुनिया भर में फैला हुआ है।
नीरू ने अपने सपने को पूरा करने के लिए ना केवल अपने बल्कि दूसरों के सपनों को पूरा करने के लिए एक उदाहरण स्थापित किया। वह एक महान संतान बनी थी – जो अपने सपनों के साथ नहीं बल्कि दूसरों के सपनों को पूरा करने के लिए जिंदगी जीने का सारांश है।