मित्रों, यदि आप भी रोजाना सुबह उठकर अपने पारिवारिक ग्रुप में ‘नासा द्वारा भारतीय ध्वज को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने’ या ‘हल्दी से कैंसर ठीक होने’ वाले 100 ग्राम सच और 900 ग्राम अफवाह से भरे मैसेज पढ़ते हैं, तो आपके लिए एक महान खुशखबरी है। वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के परम ज्ञानियों ने आखिरकार एक नया ‘फैक्ट चेक’ टूल विकसित कर लिया है। अब आपको किसी गूगल या पत्रकार की बात पर भरोसा करने की रत्ती भर जरूरत नहीं है।
नया नियम: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ यानी परम सत्य!
पुराने जमाने के फैक्ट चेकर्स सबूत, आंकड़े और विशेषज्ञों की राय मांगते थे, जो कि हमारे पारिवारिक ग्रुप एडमिन की भावनाओं के सख्त खिलाफ था। नए सिस्टम के तहत, यदि कोई मैसेज ‘Forwarded many times’ का टैग पा लेता है, तो वह अपने आप देश का नया विज्ञान बन जाता है। हमारी ‘काक-वाणी’ की टीम ने जब इसके चीफ रिसर्चर ‘फेकू राम’ से बात की, तो उन्होंने सीना ठोककर कहा, “भाई साहब, जब एक ही बात को एक लाख लोग शेयर कर रहे हैं, तो क्या सब बेवकूफ हैं? तर्क से बड़ा विश्वास होता है!”
नीले टिक और गुड मॉर्निंग का नया साइंस
इस नए फैक्ट चेक में ‘गुड मॉर्निंग’ वाले फोटो का भी वैज्ञानिक विश्लेषण शामिल किया गया है। यदि किसी फोटो पर उगते हुए सूरज के साथ ‘शुभ प्रभात’ लिखा है और नीचे चमेली का फूल बना है, तो उसके साथ लिखी किसी भी भयंकर अफवाह पर सवाल उठाना राष्ट्रद्रोह माना जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि सुबह-सुबह बिना दिमाग इस्तेमाल किए मैसेज फॉरवर्ड करने से दिमाग को उतना ही आराम मिलता है जितना 8 घंटे की कुंभकर्णी नींद से।
यूनेस्को का नया ‘बेस्ट सच’ अवॉर्ड
सूत्रों की मानें तो यूनेस्को ने इस नए फैक्ट चेक टूल को ‘दुनिया का सबसे सस्ता और टिकाऊ सच’ घोषित कर दिया है। यदि आपके पास कोई ऐसा मैसेज आए जिसमें लिखा हो “इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें वरना शाम तक आपका फोन रीचार्ज खत्म हो जाएगा”, तो समझ जाइए कि यह पूर्णतः वैज्ञानिक और प्रामाणिक है। इसे ना मानना अपने ही जोखिम पर होगा।
इसलिए दोस्तों, अगली बार जब कोई ज्ञानी आपको कहे कि ‘आपके मैसेज में कोई लॉजिक नहीं है’, तो उसे मुस्कुराकर कहिए— “लॉजिक तो पुरानी बात है, हमारे पास तो वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी की नई सत्यता है!” तो उठाइए फोन और बिना पढ़े शेयर कीजिए, क्योंकि फॉरवर्ड करने से ही तो ज्ञान का विकास होता है!