नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। आज हम उस परम ज्ञान की गंगा में गोता लगाएंगे, जो रोज सुबह आपके फोन की घंटी बजाकर आपको धन्य करती है। इस यूनिवर्सिटी के कुलपति, प्रोफेसर और शोधकर्ता सब आपके फूफाजी, मौसाजी और समाज के वो दूर के रिश्तेदार हैं, जिन्हें देश की जीडीपी से लेकर मंगल ग्रह पर पानी की खोज तक, हर बात का ‘पुख्ता’ और ‘वैज्ञानिक’ ज्ञान है।
यूनेस्को का वो ‘परम’ और अंतिम प्रमाण पत्र
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी मार्गदर्शक संस्था है ‘यूनेस्को’। इस वैश्विक संस्था के पास दुनिया में और कोई काम हो या न हो, लेकिन वह भारत की हर चीज को ‘सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करने के लिए २४ घंटे मुस्तैद रहती है। कभी हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित किया जाता है, तो कभी हमारे देश के प्रधानमंत्रियों को सबसे ताकतवर। हाल ही में तो खबर आई कि यूनेस्को ने भारत के ‘व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन्स’ को दुनिया का सबसे कर्मठ समाजसेवी घोषित कर दिया है। फैक्ट-चेक करने पर पता चला कि यूनेस्को के पेरिस मुख्यालय के अधिकारियों को इस सम्मान के बारे में तब पता चला जब उनके खुद के व्हाट्सएप पर यह मैसेज फॉरवर्ड होकर आया। धन्य है यह फॉरवर्ड ज्ञान!
नासा की दिव्य दृष्टि और २००० के नोट की ‘चिप’
इस विश्वविद्यालय का दूसरा सबसे बड़ा वैज्ञानिक विंग है ‘नासा’। दिवाली की रात भारत अंतरिक्ष से कैसा जगमगाता हुआ दिखता है, इसका असली फोटो केवल नासा के पास होता है, जो पिछले दस सालों से बिल्कुल एक जैसा ही दिख रहा है। और याद कीजिए वह ऐतिहासिक दिन, जब इस यूनिवर्सिटी के शीर्ष वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि नए गुलाबी नोट में ‘नैनो जीपीएस चिप’ लगी है, जो जमीन के १२० फीट नीचे से भी सीधे सैटेलाइट को सिग्नल भेज सकती है। जब कई उत्साही छात्रों ने नोट फाड़कर चिप ढूंढने की कोशिश की, तो अंदर केवल गांधी जी की मुस्कान मिली। लेकिन व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी, उनका तर्क था कि चिप इतनी नैनो थी कि वह हवा में विलीन हो गई।
इलाज ऐसा कि यमराज भी रास्ता बदल लें
यदि आप बीमार हैं, तो डॉक्टर के पास जाकर पैसे बर्बाद करने की कोई जरूरत नहीं है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के पास कैंसर से लेकर बुढ़ापे तक का इलाज नींबू पानी, कच्चे लहसुन और एक खास तरह के प्राणायाम में छिपा है। इस यूनिवर्सिटी की रिसर्च विंग का मानना है कि सुबह-सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से इंसान अमर हो सकता है। फैक्ट-चेक की मानें तो इन नुस्खों से आज तक केवल एक ही चीज ठीक हुई है—और वह है मैसेज भेजने वाले का ‘ज्ञान बांटने’ का मानसिक संतोष।
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके पास कोई ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ वाला मैसेज आए, तो उसे अपनी बुद्धि की कसौटी पर कसने की भूल कतई न करें। बस ‘जय हो’ या ‘गर्व है’ लिखकर आगे बढ़ा दें, क्योंकि अंधविश्वास और अफवाहें फैलाने से ही तो हमारी इस प्रिय ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का अस्तित्व बचा रहेगा!