काक-वाणी के सभी सुधी पाठकों को कांव-कांव! लोकतंत्र का एक नया नियम बाजार में आया है – अगर आप परीक्षा में फेल हो रहे हों, तो चिंता मत कीजिए, बस बगल वाले सहपाठी को परीक्षा हॉल से ही बाहर करवा दीजिए। आप बिना लिखे भी अव्वल आ जाएंगे। स्क्रॉल.इन की ताज़ा रिपोर्ट भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। रिपोर्ट कहती है कि जनता में भाजपा की लोकप्रियता भले ही ढलान पर हो, लेकिन विपक्ष की ‘आत्मघाती’ मिसाइलों ने सरकार को गहरी सांस लेने का भरपूर मौका दे दिया है। इसे ही तो कहते हैं – ‘दुश्मन मिले ना मिले, दोस्त ऐसा मिले जो खुद ही तबाह हो जाए।’
विपक्ष का परोपकार: खुद मिटेंगे, पर सरकार को आंच न आने देंगे
सचमुच, भारत का विपक्ष दुनिया का सबसे परोपकारी विपक्ष है। जब-जब जनता महंगाई, बेरोजगारी और खस्ताहाल सड़कों से तंग आकर सत्ताधारियों से सवाल पूछने का मन बनाती है, विपक्ष तुरंत खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारकर ध्यान भटका देता है। भाजपा को चुनाव जीतने के लिए अब कड़ी मेहनत करने की जरूरत ही कहां बची है? उनके लिए असली ‘चुनावी चाणक्य’ तो खुद विपक्षी दलों के नेता हैं, जो हर तीसरे दिन एक नया गठबंधन बनाते हैं और चौथे दिन उसी गठबंधन की अर्थी निकाल देते हैं। इस बेमिसाल राजनीतिक कौशल के सामने तो बड़े-बड़े रणनीतिकार भी पानी भरते नजर आते हैं।
आपसी सिर-फुटौव्वल का शानदार नजारा
कहा जा रहा है कि केंद्रीय एजेंसियों की मार ने विपक्ष की रीढ़ तोड़ दी है। लेकिन साहब, रीढ़ टूटने से पहले ही इनके बीच आपसी सिर-फुटौव्वल का जो रोमांचक खेल चलता है, वह अद्भुत है। प्रधानमंत्री पद के दावेदार यहां इतने घूम रहे हैं कि अगर सबको एक-एक दिन का मौका दिया जाए, तो साल के 365 दिन भी कम पड़ जाएं। जब तक एक विपक्षी नेता दूसरे की टांग खींचने में व्यस्त रहेगा, तब तक सत्ताधारी दल को किसी बड़े काम को करने की क्या जरूरत? जनता बदलाव के सपने देखती तो है, लेकिन विकल्प के नाम पर फैले रायते को देखकर वह वापस अपने पुराने ढर्रे पर लौट आती है। इसे कहते हैं – ‘जीतना हमारी मजबूरी नहीं, विपक्ष की कमजोरी है।’
सत्ताधारियों को मुफ्त की ऑक्सीजन
भाजपा के रणनीतिकार रात को चैन की नींद सोते हैं। उन्हें पता है कि अगर सुबह कोई गंभीर राष्ट्रीय मुद्दा उठ भी खड़ा हुआ, तो शाम होते-होते कोई न कोई विपक्षी सूरमा ऐसा बयान दे देगा कि पूरा विमर्श ही बदल जाएगा। विपक्ष का यह आत्म-विनाशकारी रवैया सरकार के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है। काक-वाणी का मानना है कि भाजपा को विपक्ष के इन ‘स्टार प्रचारकों’ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक बड़ा धन्यवाद पत्र जारी करना चाहिए। आखिर डूबते को तिनके का सहारा देने वाले का सम्मान तो होना ही चाहिए!
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