विशाल सम्राट और नन्ही पीहू: सच्चे प्रेम की अनकही दास्तान

सुंदरवन के घने जंगलों में ‘सम्राट’ नाम का एक विशालकाय हाथी रहता था। वह अपनी अपार ताकत और बड़े आकार के कारण जंगल में अकेला और थोड़ा अहंकारी जीवन जीता था। उसका कोई मित्र नहीं था, क्योंकि सभी छोटे जानवर उससे डरकर दूर भागते थे। एक रात, जंगल में भयंकर तूफान आया। तेज़ हवाओं के बीच ‘पीहू’ नाम की एक नन्ही चिड़िया का घोंसला उजड़ गया और वह उड़ते-उड़ते थककर बेहोश होकर सम्राट की पीठ पर गिर गई।

एक अनोखी शुरुआत

अगली सुबह जब सम्राट जागा, तो उसे अपनी पीठ पर एक अजीब सी हलचल महसूस हुई। उसने अपनी सूंड घुमाकर देखा कि एक छोटी सी, भीगी हुई चिड़िया ठंड से कांप रही थी। सम्राट ने पहले तो उसे गुस्से में अपनी पीठ से झाड़ने की कोशिश की, लेकिन पीहू ने डरने के बजाय अपनी नन्ही चोंच से सम्राट के माथे को सहलाया। पीहू की इस मासूमियत और निडरता ने सम्राट के कठोर दिल को अंदर तक झकझोर दिया। उसने पीहू को अपनी पीठ पर रहने की अनुमति दे दी। धीरे-धीरे, उनके बीच एक अटूट और भावुक रिश्ता बन गया।

परीक्षा की घड़ी

कुछ महीनों बाद, जंगल में भयंकर सूखा पड़ा। नदियाँ और तालाब सूख गए। सम्राट पानी की तलाश में भटकने लगा और कमजोरी के कारण एक दिन घने दलदल में फंस गया। वह जितना निकलने की कोशिश करता, उतना ही धंसता जाता। सम्राट ने हार मान ली और अपनी मौत का इंतजार करने लगा। उसने पीहू से कहा, “पीहू, तुम यहाँ से उड़ जाओ, मैं अब नहीं बचूँगा।”

नन्ही पीहू का साहसिक प्रयास

पीहू ने रोते हुए कहा, “मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी।” वह तुरंत उड़कर जंगल के सभी छोटे-छोटे जानवरों, खरगोशों और चूहों के पास गई। उसने रोते हुए सभी से सम्राट की जान बचाने की भीख मांगी। सम्राट ने अतीत में भले ही कभी किसी की मदद न की हो, लेकिन पीहू के निस्वार्थ प्रेम और आंसुओं को देखकर सभी जानवरों का दिल पिघल गया।

सैकड़ों चूहों और खरगोशों ने मिलकर दलदल के आस-पास की मिट्टी को तेजी से खोदना शुरू किया, जिससे सम्राट को पैर हिलाने की जगह मिली। फिर, जंगल के सभी बंदरों ने मजबूत लताएँ सम्राट की तरफ फेंकी, जिन्हें सम्राट ने अपनी सूंड से पकड़ लिया। सभी ने मिलकर पूरी ताकत से खींचा और सम्राट को दलदल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सम्राट की आँखों से आँसू बह रहे थे। उसने नन्ही पीहू को अपनी सूंड पर बिठाया और महसूस किया कि दुनिया में सबसे बड़ी ताकत शारीरिक आकार नहीं, बल्कि प्रेम और एकता है।

कहानी की सीख

यह पंचतंत्र की नैतिक कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम और निस्वार्थ भाव से की गई मित्रता कभी व्यर्थ नहीं जाती। जीवन में दूसरों का आदर और उनकी मदद करना ही हमें संकट के समय सुरक्षा देता है।

कागा जी