वाह! साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद तो हमारे सीने का चौवन इंच का घेरा बढ़कर सीधे बहत्तर इंच का हो गया है। अखबार कहता है कि भारत अब यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने के लिए “बेहद गंभीर” हो रहा है। भला हो इस चीनी प्रभाव वाले विदेशी मीडिया का, जिसने दुनिया को समय रहते बता दिया कि जब हमारे प्रधान सेवक विदेश यात्राओं पर जाते हैं, तो वे केवल गले मिलने या सेल्फी खिंचवाने नहीं जाते, बल्कि विश्व शांति का आखिरी ब्लूप्रिंट अपनी नेहरू-जैकेट की जेब में लेकर चलते हैं।
घर की मुर्गी दाल बराबर, विदेश की शांति सबसे बेहतर
अब कुछ कुटिल और देशद्रोही किस्म के लोग हंसेंगे। वे पूछेंगे कि साहब, जो देश अपने मानसून में डूबे शहरों के नाले साफ नहीं करवा पा रहा, जो परीक्षाओं के पेपर लीक होने से नहीं रोक पा रहा, वो रूस और यूक्रेन के बीच बारूद का बरसना कैसे रोकेगा? अरे मूर्खों! घरेलू समस्याओं में क्या रखा है? स्थानीय नगर निगम के गड्ढे भरना या बेरोजगारी मिटाना बेहद उबाऊ काम हैं। असली मजा तो वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन के बीच ‘पंचायती’ करने में है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी वैसे भी अंतरराष्ट्रीय पंचायती राज के सबसे बड़े पैरोकार बनकर उभरे हैं।
‘शांति’ का नया भारतीय फॉर्मूला
आखिर भारत इस युद्ध को कैसे रोकेगा? हमारे राजनीतिक पंडितों की मानें तो भारत दोनों देशों को योग और ध्यान सिखाने की योजना बना रहा है। पुतिन को ‘अनुलोम-विलोम’ और जेलेंस्की को ‘भ्रामरी प्राणायाम’ कराकर उनके भीतर के युद्ध-उत्तेजक हॉर्मोन्स को शांत किया जाएगा। अगर इससे भी बात नहीं बनी, तो भारत दोनों को सख्त लहजे में चेतावनी देगा कि अगर युद्ध बंद नहीं हुआ, तो हम सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद कर देंगे—जो कि हम कभी नहीं करेंगे, क्योंकि देश में राष्ट्रवाद के साथ-साथ बजट भी तो संभालना है!
नरेंद्र मोदी जी की इस कूटनीति का लोहा अब वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक माना जा रहा है। यह अलग बात है कि मणिपुर पिछले डेढ़ साल से सुलग रहा है, लेकिन यूक्रेन की चिंता ज्यादा जरूरी है क्योंकि वहां की शांति से ग्लोबल रैंकिंग सुधरती है। हमारे स्थानीय संकटों से किसी को क्या लेना-देना, वो तो वैसे भी हमारी नियति हैं!
निष्कर्ष: शांति तो होकर रहेगी!
खैर, यूक्रेन के नागरिकों, अब अपनी सांसें थाम लो और बम शेल्टरों से बाहर आ जाओ। जब भारत किसी बात को लेकर ‘गंभीर’ हो जाता है, तो फिर समझो काम हो गया। बस दुआ कीजिए कि इस शांति समझौते का कोई पेपर लीक न हो जाए, वरना दोनों देशों को फिर से युद्ध की परीक्षा देनी पड़ जाएगी!
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